चाईबासा: चाईबासा के टाटा बाईपास चौक पर प्रस्तावित दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापना को लेकर नया विवाद सामने आया है। आदिवासी हो समाज युवा महासभा एवं विभिन्न सामाजिक, पारंपरिक और जनसंगठनों ने प्रतिमा स्थापना पर सर्वसम्मति से निर्णय लेने की मांग करते हुए 1 से 4 अगस्त तक टाटा बाईपास चौक पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। वहीं, 1 अगस्त को तांबो चौक से प्रस्तावित प्रतिमा स्थल तक पदयात्रा भी निकाली जाएगी।

 

शुक्रवार को हरिगुटू स्थित आदिवासी हो समाज महासभा के कला एवं संस्कृति भवन में आयोजित संयुक्त बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक की अध्यक्षता आदिवासी हो समाज युवा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद बिरुवा ने की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि टाटा बाईपास चौक चाईबासा का प्रमुख सार्वजनिक स्थल है, इसलिए यहां किसी भी प्रतिमा की स्थापना से पहले सभी सामाजिक संगठनों, स्थानीय नागरिकों और संबंधित पक्षों की सहमति आवश्यक है।

 

बैठक में तय किया गया कि धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में आयोजित होगा। धरना के दौरान प्रदर्शनकारी प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे और मांग करेंगे कि टाटा बाईपास चौक पर कोल्हान के जननायक एवं वीर शहीद पोटो हो की प्रतिमा स्थापित कर चौक का नामकरण उनके नाम पर किया जाए।

 

आयोजकों ने बताया कि इस संबंध में अनुमंडल पदाधिकारी (सदर), चाईबासा को आवेदन देकर धरना और पदयात्रा की अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था तथा आवश्यक प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। साथ ही प्रशासन से आग्रह किया गया है कि प्रतिमा स्थापना के मुद्दे पर सभी पक्षों के साथ शीघ्र सर्वदलीय एवं सर्वपक्षीय विचार-विमर्श कर ऐसा निर्णय लिया जाए, जिससे सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास बना रहे।

 

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पदयात्रा आदिवासी हो समाज युवा महासभा के बैनर तले हो समाज के विभिन्न सामाजिक, पारंपरिक एवं जनसंगठनों की संयुक्त भागीदारी में निकाली जाएगी। कार्यक्रम के अंत में सभी नागरिकों से शांति, अनुशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करते हुए आंदोलन को सफल बनाने की अपील की गई।

 

बैठक में महासचिव गब्बर सिंह हेंब्रम, शेरसिंह बिरुवा, ऑयबन हेंब्रम, सुरेन्द्र पूर्ति, सत्यव्रत बिरुवा, रियांश समाड, महेंद्र जमुदा, रमेश बालमुचू, मुरारी अल्डा, सुरेश सोय, सुशील कुमार पूर्ति, रबिंद्र अल्डा, महती पूर्ति, कुसुम केराई, राजेंद्र प्रकाश जोंकों, हरीश चंद्र कुंकल, मंगल सिंह कालुंडिया सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।