रांची: राजधानी रांची के करमटोली तालाब स्थित धोबीघाट में शुक्रवार सुबह नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की। भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में निगम की टीम ने बुलडोज़र चलाकर करीब 11 मकानों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा और वर्षों से यहां रह रहे परिवारों के आशियाने देखते ही देखते मलबे में तब्दील हो गए।
अपने घरों को टूटता देख कई महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे फूट-फूटकर रोते नजर आए। प्रभावित लोगों का कहना है कि उनका परिवार पिछले 100 वर्षों से भी अधिक समय से इसी इलाके में रह रहा है, लेकिन एक झटके में उनका सब कुछ उजड़ गया। लोगों ने आरोप लगाया कि नगर निगम ने बिना किसी पूर्व सूचना या पर्याप्त समय दिए अचानक कार्रवाई कर दी, जिससे उन्हें अपना सामान तक समेटने का मौका नहीं मिला।
बारिश के मौसम में बेघर हुए परिवारों के सामने अब सबसे बड़ी चिंता सिर छिपाने की है। प्रभावित लोगों का कहना है कि उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं और अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे कहां जाएं और कैसे अपना जीवन फिर से शुरू करें। कई परिवार खुले आसमान के नीचे अपने सामान के साथ बैठे दिखाई दिए।
हालांकि, नगर निगम की ओर से जानकारी मिली है कि कुछ प्रभावित परिवारों के लिए आवास (क्वार्टर) उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। हालांकि सभी प्रभावितों को इसका लाभ मिलेगा या नहीं, इसे लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
नगर निगम की इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से पुनर्वास की समुचित व्यवस्था करने और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है। वहीं प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को शहर के विकास और तालाब क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त बनाने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है।
अब इस पूरे मामले पर लोगों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन परिवारों के घर टूट गए हैं, उनके पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर प्रशासन क्या निर्णय लेता है।
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