पटना। नीट (NEET) पेपर लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में गुरुवार को बिहार बंद का व्यापक असर देखने को मिला। राजधानी पटना समेत राज्य के कई जिलों में छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के समर्थकों ने प्रदर्शन किया। हालांकि, पटना के डाकबंगला चौराहे पर प्रदर्शन उस समय हिंसक हो गया जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई। पथराव और बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेज प्रताप यादव को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

बिहार बंद का व्यापक असर, राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

बिहार बंद के आह्वान को देखते हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर था। राजधानी पटना सहित संवेदनशील जिलों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। स्थानीय पुलिस के अलावा सीआरपीएफ (CRPF) और सीआईएसएफ (CISF) के जवानों को भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया। पूरे राज्य में करीब 70 हजार सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

पटना के प्रमुख चौक-चौराहों, सरकारी कार्यालयों, रेलवे स्टेशनों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। कई जिलों में एहतियातन स्कूलों को भी बंद रखा गया।

रामगुलाम चौक पर चढ़े प्रदर्शनकारी, तेज प्रताप यादव पहुंचे समर्थन में

प्रदर्शन के दौरान रामगुलाम चौक के पास कुछ प्रदर्शनकारी मोबाइल टावर पर चढ़ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। मौके पर पहुंचे राजद नेता तेज प्रताप यादव ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और तिरंगा लहराते हुए आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता जताई।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हस्तक्षेप किया और बाद में तेज प्रताप यादव को हिरासत में ले लिया। उनकी हिरासत की खबर के बाद प्रदर्शनकारियों में और आक्रोश देखने को मिला।

डाकबंगला चौराहे पर बेकाबू हुई स्थिति

भारी सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग के बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी डाकबंगला चौराहे तक पहुंच गए। यहां प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की और सुरक्षाकर्मियों पर ईंट-पत्थर फेंकने शुरू कर दिए।

हालात बिगड़ते देख पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखी तो लाठीचार्ज कर भीड़ को हटाया गया। घटना के दौरान इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

पुलिस पर पथराव, कई प्रदर्शनकारी हिरासत में

पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल पर पथराव किया और बैरिकेडिंग तोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करनी पड़ी।

एसएसपी ने स्पष्ट किया कि हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने मौके से कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।

आंदोलन की प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारी छात्रों और विभिन्न संगठनों की मुख्य मांगें थीं—

  • NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच।
  • दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई।
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
  • छात्र आंदोलनों के दौरान हुए लाठीचार्ज की न्यायिक जांच।
  • परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुधार।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।

संवेदनशील जिलों में विशेष निगरानी

प्रशासन ने पटना के अलावा जहानाबाद, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय सहित लगभग 10 संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। पुलिस लगातार सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और सोशल मीडिया के माध्यम से हालात पर नजर रख रही है।

अधिकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।

प्रशासन की अपील

बिहार पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है। प्रशासन ने कहा कि कानून अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों का सम्मान किया जाएगा।