पटना। बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा और प्रदर्शन के बाद राज्य की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। पुलिस कार्रवाई के तहत अब तक राज्यभर से करीब 450 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार लोगों में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता शामिल हैं। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव तथा सीपीआई(एमएल) विधायक संदीप सौरभ की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दलों का विरोध और तेज हो गया है।

इस बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए सभी गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर रिहाई नहीं हुई तो राजद राज्यभर में हाल के प्रदर्शनों से भी बड़ा आंदोलन शुरू करेगा।

बिहार बंद के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

NEET पेपर लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्र आंदोलनों के समर्थन में आयोजित बिहार बंद के दौरान कई जिलों में प्रदर्शन हुए थे। कुछ स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया और कई गिरफ्तारियां कीं।

पुलिस के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। हालांकि विपक्षी दलों का आरोप है कि कई निर्दोष छात्रों और युवाओं को भी गिरफ्तार किया गया है।

तेजस्वी यादव ने सरकार को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

राजद नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाई तेज प्रताप यादव समेत सभी गिरफ्तार छात्रों, युवाओं और प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई की मांग की है।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों को जेल भेजना सरकार की दमनकारी नीति को दर्शाता है। तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया कि यदि अगले 24 घंटे के भीतर सभी गिरफ्तार लोगों को रिहा नहीं किया गया, तो राजद राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन छेड़ेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है, लेकिन विपक्ष और छात्र संगठन पीछे हटने वाले नहीं हैं।

तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी पर बढ़ा विरोध

बिहार बंद के दौरान पटना में हुए प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे तेज प्रताप यादव को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी को लेकर राजद कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही है।

राजद नेताओं का कहना है कि तेज प्रताप यादव लोकतांत्रिक आंदोलन का समर्थन करने पहुंचे थे और उनकी गिरफ्तारी पूरी तरह राजनीतिक है। पार्टी लगातार उनकी रिहाई की मांग कर रही है।

CPI और वाम दल भी आए समर्थन में

केवल राजद ही नहीं, बल्कि वामपंथी दलों ने भी गिरफ्तार छात्रों और नेताओं की रिहाई की मांग उठाई है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने बयान जारी कर कहा है कि तेज प्रताप यादव, सीपीआई(एमएल) विधायक संदीप सौरभ और सभी गिरफ्तार छात्रों-युवाओं को बिना शर्त रिहा किया जाना चाहिए।

वाम दलों का कहना है कि छात्रों और युवाओं के आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस कार्रवाई की जा रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

छात्रों की गिरफ्तारी को लेकर बढ़ रहा दबाव

छात्र संगठनों का दावा है कि बड़ी संख्या में छात्रों को केवल प्रदर्शन में शामिल होने के कारण हिरासत में लिया गया है। विभिन्न छात्र संगठन इन गिरफ्तारियों के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं।

उनका कहना है कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

सरकार और पुलिस का पक्ष

पुलिस प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ की गई है जिन्होंने कानून-व्यवस्था भंग करने, पथराव करने, बैरिकेडिंग तोड़ने या सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया।

अधिकारियों के अनुसार, सभी गिरफ्तारियां कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई हैं और प्रत्येक मामले की जांच की जा रही है।

आगे क्या?

राजद द्वारा दिए गए 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद बिहार की राजनीति और गरमा गई है। यदि सरकार गिरफ्तार लोगों की रिहाई पर कोई निर्णय नहीं लेती, तो विपक्ष बड़े आंदोलन की तैयारी कर सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्र आंदोलन, NEET पेपर लीक विवाद और गिरफ्तारियों का मुद्दा आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का प्रमुख विषय बन सकता है।