कोलकाता/नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को गुरुवार को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा जब पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के साथ ही हाल के दिनों में पार्टी छोड़ने वाले राज्यसभा सांसदों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है।

इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। लगातार हो रहे इन इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व, विशेषकर ममता बनर्जी की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

राज्यसभा में घट रही TMC की ताकत

प्रकाश चिक बड़ाईक के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में टीएमसी की संख्या और कम हो गई है। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि अगले कुछ दिनों में पार्टी के कुछ और सांसद भी इस्तीफा दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो संसद में टीएमसी की स्थिति और कमजोर हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम सिर्फ संख्या बल का मामला नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों का संकेत भी है।

सभापति को सौंपा इस्तीफा

राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को भेजे गए अपने पत्र में प्रकाश चिक बड़ाईक ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध किया।

अपने पत्र में उन्होंने राज्यसभा के सभापति, उपसभापति और सचिवालय के अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान पूरा सहयोग मिला।

हालांकि उन्होंने इस्तीफे के पीछे किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे टीएमसी के भीतर चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।

कांग्रेस में विलय की अटकलों पर बागी गुट का जवाब

इस बीच टीएमसी के बागी नेता रितब्रत बनर्जी ने कांग्रेस में विलय की सभी अटकलों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से पार्टी का आंतरिक मामला है और किसी भी स्तर पर कांग्रेस में शामिल होने की कोई योजना नहीं है।

रितब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उनके गुट को अब 64 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि जल्द ही विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन संबंधी पत्र सौंपा जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि न तो विधायक दल और न ही सांसदों का कोई समूह कांग्रेस में विलय करने जा रहा है।

अधीर रंजन चौधरी ने भी बनाई दूरी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी टीएमसी और कांग्रेस के संभावित विलय की खबरों से दूरी बना ली है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह की किसी चर्चा या प्रस्ताव की जानकारी नहीं है।

चौधरी ने कहा कि जब तक कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आता, तब तक इस विषय पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

सुष्मिता देव के इस्तीफे ने बढ़ाई अटकलें

इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच राज्यसभा की पूर्व सांसद सुष्मिता देव का इस्तीफा भी चर्चा में बना हुआ है। उन्होंने हाल ही में कहा था कि वह असम में अपने राजनीतिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं।

हालांकि उनकी हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात के बाद उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। सुष्मिता देव ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनका फैसला व्यक्तिगत और राजनीतिक कारणों से प्रेरित है।

क्या TMC में गहराता जा रहा है संकट?

लगातार हो रहे इस्तीफे और बागी नेताओं के दावे इस ओर संकेत कर रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। यदि आने वाले दिनों में और सांसद या विधायक पार्टी से अलग होते हैं, तो यह ममता बनर्जी के नेतृत्व के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले कुछ दिन टीएमसी की आंतरिक राजनीति और पश्चिम बंगाल की सत्ता समीकरणों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।