चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर थाना क्षेत्र के सोनपोखरी गांव में खेत की जुताई के दौरान एक संदिग्ध मोर्टार शेल मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। करीब 30 किलोग्राम वजन और लगभग दो फीट लंबे इस जंग लगे विस्फोटक जैसी वस्तु के मिलने के बाद पुलिस, सीआरपीएफ और बम निरोधक दस्ता (BDDS) की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और सुरक्षा घेरा बनाकर उसे अपने कब्जे में ले लिया। घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में लोगों के बीच चर्चा और चिंता का माहौल बना हुआ है।

प्रारंभिक जांच में यह वस्तु मोर्टार शेल जैसी प्रतीत हो रही है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इसकी वास्तविक प्रकृति और क्षमता का पता विशेषज्ञ जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सतर्क रहने की अपील की है।

खेत की जुताई के दौरान हुआ खुलासा

जानकारी के अनुसार सोनपोखरी गांव निवासी विजय हेंब्रम अपने खेत में ट्रैक्टर से जुताई करा रहे थे। खेती के सामान्य कार्य के दौरान अचानक ट्रैक्टर चालक शिवचरण महतो को महसूस हुआ कि जमीन के नीचे कोई भारी वस्तु दबा हुआ है।

शुरुआत में इसे सामान्य पत्थर या लोहे का कोई बड़ा टुकड़ा समझा गया, लेकिन जब मिट्टी हटाकर उसे बाहर निकाला गया तो सभी हैरान रह गए। जमीन के भीतर से एक बड़ा, बेलनाकार और जंग लगा धातु का ढांचा निकला जो देखने में मोर्टार शेल जैसा लग रहा था।

वस्तु का आकार और वजन देखकर ग्रामीणों को आशंका हुई कि यह कोई विस्फोटक सामग्री हो सकती है। इसके बाद बिना कोई जोखिम उठाए ग्रामीणों ने तुरंत स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी।

सूचना मिलते ही हरकत में आया प्रशासन

घटना की जानकारी मिलते ही मनोहरपुर थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीआरपीएफ के जवानों को भी बुलाया गया।

पुलिस ने सबसे पहले सुरक्षा के लिहाज से पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की और ग्रामीणों को संदिग्ध वस्तु से दूर रहने की सलाह दी। बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचने लगे थे, इसलिए प्रशासन को भीड़ नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी।

इसके बाद सीआरपीएफ की बम निरोधक टीम (BDDS) को बुलाया गया, जिसने मौके पर पहुंचकर संदिग्ध वस्तु की प्रारंभिक जांच शुरू की।

बम निरोधक दस्ता कर रहा जांच

बम निरोधक दस्ते के विशेषज्ञों ने संदिग्ध मोर्टार शेल का निरीक्षण किया और उसकी स्थिति का आकलन किया।

विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह वास्तव में मोर्टार शेल है या किसी अन्य प्रकार का सैन्य गोला-बारूद। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि उसमें अब भी विस्फोटक सामग्री मौजूद है या वह पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है।

अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विस्तृत तकनीकी जांच आवश्यक होती है। इसलिए रिपोर्ट आने तक किसी भी तरह की अटकलों से बचने की सलाह दी गई है।

एसपी अमित रेणु ने क्या कहा?

पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद पुलिस और सीआरपीएफ की टीम ने संदिग्ध मोर्टार शेल को सुरक्षित रूप से अपने कब्जे में ले लिया है।

उन्होंने कहा कि बम निरोधक दस्ता द्वारा इसकी जांच की गई है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एसपी ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल आम लोगों को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और स्थिति नियंत्रण में है।

ग्रामीणों में उत्सुकता और चिंता

घटना की खबर फैलते ही आसपास के गांवों के लोग भी सोनपोखरी पहुंचने लगे। कई लोगों ने पहली बार इतने बड़े आकार की सैन्य वस्तु देखी थी।

कुछ ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि यह वास्तव में सक्रिय विस्फोटक निकला तो बड़ा हादसा हो सकता था। वहीं कुछ लोगों का मानना था कि यह वस्तु कई वर्षों से जमीन के भीतर दबा हुआ रहा होगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले कभी ऐसी घटना सामने नहीं आई थी। इसलिए अचानक खेत से मोर्टार शेल जैसी वस्तु निकलना सभी के लिए आश्चर्य का विषय बन गया है।

आखिर खेत में कैसे पहुंचा मोर्टार शेल?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतना बड़ा सैन्य विस्फोटक खेत के भीतर कैसे पहुंचा।

विशेषज्ञों के अनुसार कई बार पुराने सैन्य अभ्यास, युद्धकालीन गतिविधियों या हथियारों के परिवहन के दौरान ऐसी सामग्री जमीन में दब जाती है। समय के साथ मिट्टी और वनस्पतियों के कारण वे पूरी तरह छिप जाती हैं।

हालांकि सोनपोखरी क्षेत्र में ऐसा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड अभी सामने नहीं आया है। इसलिए जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि यह वस्तु यहां कब और कैसे पहुंची।

बहरागोड़ा में भी मिल चुका है अमेरिकी बम

झारखंड में इस तरह की घटना पहली बार नहीं हुई है।

इससे पहले 17 मार्च को पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा क्षेत्र में सुवर्णरेखा नदी के किनारे करीब 500 पाउंड का अमेरिकी बम मिलने की घटना सामने आई थी। उस समय भी सुरक्षा एजेंसियों को विशेष अभियान चलाना पड़ा था।

दिलचस्प बात यह रही कि कुछ दिनों बाद उसी क्षेत्र में एक और संदिग्ध बम जैसी वस्तु देखे जाने की सूचना मिली थी। इससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई थी।

इन घटनाओं के बाद विशेषज्ञों ने संभावना जताई थी कि पुराने सैन्य गोला-बारूद देश के विभिन्न हिस्सों में अब भी जमीन के भीतर दबे हो सकते हैं।

प्रशासन ने जारी की सलाह

घटना के बाद प्रशासन ने ग्रामीणों और आम नागरिकों के लिए विशेष सलाह जारी की है।

अधिकारियों ने कहा है कि यदि खेत, जंगल, नदी किनारे या निर्माण कार्य के दौरान कोई संदिग्ध धातु की वस्तु दिखाई दे तो उसे छूने, उठाने या हटाने का प्रयास न करें।

ऐसी स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस या प्रशासन को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित उपाय है। कई बार वर्षों पुराने विस्फोटक भी खतरनाक साबित हो सकते हैं।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बम निरोधक दस्ते की रिपोर्ट मानी जा रही है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि बरामद वस्तु वास्तव में मोर्टार शेल है या नहीं, उसमें विस्फोटक क्षमता शेष है या नहीं और उसे सुरक्षित रूप से निष्क्रिय करने की आवश्यकता है या नहीं।

प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और यदि जरूरत पड़ी तो सेना या अन्य विशेषज्ञ एजेंसियों की मदद भी ली जा सकती है।

निष्कर्ष

सोनपोखरी गांव में खेत की जुताई के दौरान मिला संदिग्ध मोर्टार शेल पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस, सीआरपीएफ और बम निरोधक दस्ता मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी प्रकार के तत्काल खतरे की सूचना नहीं है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे इस रहस्यमयी वस्तु की वास्तविक पहचान और इतिहास का खुलासा हो सकेगा।