रांची। राज्य की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य परियोजनाओं में शामिल RIMS-2 को लेकर अब ग्रामीणों का विरोध खुलकर सामने आने लगा है। परियोजना के विरोध में प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीण सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी भी तरह की हिंसा या टकराव के पक्ष में नहीं हैं, बल्कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार के सामने रखना चाहते हैं।
जमीन और विस्थापन को लेकर ग्रामीणों की चिंता
ग्रामीणों का आरोप है कि RIMS-2 परियोजना के लिए जिन क्षेत्रों की पहचान की गई है, वहां रहने वाले लोगों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उनका कहना है कि परियोजना के कारण कई परिवारों के विस्थापन का खतरा पैदा हो सकता है।
ग्रामीणों का मानना है कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास के नाम पर स्थानीय लोगों के अधिकारों और आजीविका की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उनका कहना है कि सरकार को पहले प्रभावित परिवारों से संवाद स्थापित करना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।
शांतिपूर्ण आंदोलन के जरिए सरकार तक पहुंचेगी बात
आंदोलन में शामिल ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। उन्होंने कहा कि वे रैली, धरना और जनसंपर्क अभियान के माध्यम से सरकार को अपनी मांगों और चिंताओं से अवगत कराएंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार समय रहते उनकी बात नहीं सुनती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने दोहराया कि उनका संघर्ष लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा।
सरकार से संवाद की मांग
ग्रामीणों ने राज्य सरकार से मांग की है कि परियोजना को लेकर प्रभावित लोगों के साथ खुली बातचीत की जाए। उनका कहना है कि बिना सहमति और उचित पुनर्वास योजना के किसी भी प्रकार का अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों के अनुसार, यदि सरकार और प्रशासन उनकी बात सुनने के लिए आगे आते हैं तो समाधान का रास्ता निकाला जा सकता है। उनका उद्देश्य विकास कार्यों को रोकना नहीं बल्कि अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
RIMS-2 परियोजना पर बनी हुई है नजर
RIMS-2 को झारखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने वाली एक बड़ी परियोजना माना जा रहा है। लेकिन परियोजना से जुड़े जमीन और विस्थापन के मुद्दों ने इसे विवादों के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और आंदोलनकारी ग्रामीणों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है।
निष्कर्ष
RIMS-2 परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध अब संगठित रूप लेता दिख रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे और सरकार को चेताने की कोशिश करेंगे। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस विरोध और ग्रामीणों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।