रांची: राजधानी रांची में नदी, नालों, डैम और तालाबों पर बढ़ते अतिक्रमण के खिलाफ अब बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने जलाशयों और जलधाराओं के आसपास अवैध रूप से बने मकानों, अपार्टमेंट, अस्पतालों और अन्य निर्माणों को हटाने की तैयारी तेज कर दी है। प्रशासन जल्द ही व्यापक सर्वे कर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकता है।
अतिक्रमण से खत्म होती जा रही हैं शहर की नदियां
रांची के कोकर स्थित बगला बाबा खटाल के पास बहने वाली नदी इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन चुकी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मोरहाबादी, बरियातू हाउसिंग और रिम्स क्षेत्र से होकर गुजरने वाली यह जलधारा कभी स्वर्णरेखा नदी में मिलती थी, लेकिन लगातार अतिक्रमण और गंदगी के कारण अब इसका अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है।
शहर की कई छोटी नदियां और जलधाराएं आज नालों में तब्दील हो गई हैं, जिससे जल निकासी व्यवस्था और पर्यावरण दोनों प्रभावित हुए हैं।
नालों पर खड़े हो गए बहुमंजिला भवन और अस्पताल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शहर के कई हिस्सों में नालों और जलधाराओं के ऊपर पिलर डालकर बहुमंजिला इमारतें, अपार्टमेंट, अस्पताल और व्यावसायिक भवन बना दिए गए हैं। कई स्थानों पर नालों के आसपास मिट्टी भरकर जमीन तैयार की जा रही है, जिससे अतिक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है।
लोगों का कहना है कि जलधाराओं की जमीन को सफेद पट्टा के नाम पर बेचे जाने से प्राकृतिक जल स्रोतों का दायरा लगातार सिकुड़ता गया।
प्रशासन करेगा सर्वे, अवैध निर्माणों पर होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने नदी, नाले, तालाब और डैम के आसपास बने निर्माणों का सर्वे कराने की तैयारी शुरू कर दी है। जिन भवनों और संस्थानों द्वारा जलधाराओं की जमीन पर अतिक्रमण किया गया है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का उद्देश्य शहर के प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करना और भविष्य में जलभराव तथा पर्यावरणीय समस्याओं को कम करना है।
जल संरक्षण और भू-जल स्तर सुधारने में मिलेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नदियों और नालों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाता है तो जल संचयन क्षमता बढ़ेगी, भू-जल स्तर में सुधार होगा और भविष्य में पानी की कमी जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी।
इसके अलावा मानसून के दौरान जल निकासी बेहतर होने से शहरी बाढ़ और जलभराव की घटनाओं में भी कमी आ सकती है।
लोगों ने किया फैसले का स्वागत
शहरवासियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस कदम का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जमीन पर प्रभावी कार्रवाई भी जरूरी है ताकि बची हुई नदियों, नालों और जलाशयों को संरक्षित किया जा सके।
स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द कार्रवाई कर राजधानी के प्राकृतिक जल स्रोतों को अतिक्रमण से मुक्त कराएगा।