पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल, चाईबासा में चिकित्सकों की सतर्कता, त्वरित निर्णय और कुशल उपचार से एक मरीज की जान बच गई। गले में पूरी मछली फंस जाने के कारण गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचे मरीज का सफल इलाज कर डॉक्टरों ने उसे नई जिंदगी दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मरीज के गले में मछली फंस जाने से उसे सांस लेने और भोजन निगलने में काफी परेशानी हो रही थी। स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। परिजन आनन-फानन में मरीज को गंभीर अवस्था में सदर अस्पताल के आपातकालीन विभाग लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने तुरंत उपचार शुरू किया।
चिकित्सकों की कुशलता और त्वरित कार्रवाई आई काम
मामले की गंभीरता को देखते हुए आपातकालीन विभाग में तैनात डॉ. प्रदीप कुमार और उनकी टीम ने बिना समय गंवाए मरीज की जांच की। जांच के दौरान पता चला कि मरीज के गले में पूरी मछली फंसी हुई है, जिससे उसकी जान को खतरा हो सकता था।
डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ, अनुभव और चिकित्सकीय दक्षता का परिचय देते हुए सावधानीपूर्वक गले में फंसी मछली को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। समय रहते किए गए इस उपचार से एक बड़ा हादसा टल गया।
मछली निकलते ही मरीज को मिली राहत
गले से मछली निकलने के तुरंत बाद मरीज को राहत महसूस हुई और उसकी सांस लेने व भोजन निगलने की समस्या दूर हो गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, समय पर चिकित्सा सहायता और डॉक्टरों की तत्परता के कारण मरीज की जान बचाई जा सकी।
फिलहाल मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर है और वह खतरे से बाहर बताया जा रहा है।
सिविल सर्जन ने टीम की सराहना की
इस सफल उपचार में आपातकालीन विभाग के चिकित्सकों के साथ नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य सहयोगी कर्मियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। सिविल सर्जन डॉ. जुझार माझी तथा अस्पताल प्रबंधन ने डॉ. प्रदीप कुमार और उनकी पूरी टीम को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी है।
सिविल सर्जन ने कहा कि सदर अस्पताल, चाईबासा की चिकित्सा टीम आपातकालीन परिस्थितियों में भी मरीजों को गुणवत्तापूर्ण, त्वरित और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी लगातार लोगों की सेवा में समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि समय पर चिकित्सा सहायता और प्रशिक्षित चिकित्सकों की मौजूदगी गंभीर से गंभीर परिस्थितियों में भी मरीजों की जान बचा सकती है।