रांची/चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन सुरंग में हुए दर्दनाक हादसे ने झारखंड के कई परिवारों को चिंता में डाल दिया है। विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में अचानक पानी और मलबा भरने के बाद हुए हादसे में झारखंड के एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि पांच मजदूर घायल हुए हैं। वहीं, एक अन्य मजदूर के सुरंग में फंसे होने की जानकारी सामने आई है। लापता मजदूर को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

हादसे की जानकारी सामने आने के बाद झारखंड सरकार भी सक्रिय हो गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बातचीत कर हादसे की जानकारी ली और झारखंड के प्रभावित मजदूरों की स्थिति के बारे में जानकारी हासिल की। राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों को उत्तराखंड प्रशासन के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया है।

अचानक सुरंग में भर गया पानी और मलबा

जानकारी के अनुसार, चमोली जिले के मायापुर और पीपलकोटी क्षेत्र में विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में गुरुवार शाम अचानक पानी और मलबा भर गया। उस समय सुरंग के अंदर बड़ी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे।

हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहत और बचाव दलों ने तत्काल अभियान शुरू किया। प्रशासन और बचाव एजेंसियों की मदद से कई मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि कुछ मजदूर सुरंग के अंदर फंस गए।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हादसे के समय सुरंग में कुल 29 श्रमिक काम कर रहे थे। इनमें से 19 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हादसे में सात श्रमिकों की मौत की सूचना है, जबकि तीन मजदूरों के लापता होने की जानकारी सामने आई। इनमें एक मजदूर के झारखंड का होने की पुष्टि राज्य सरकार ने की है।

झारखंड के सात मजदूर हुए प्रभावित

इस हादसे में झारखंड के कुल सात मजदूर प्रभावित हुए हैं। इनमें पूर्वी सिंहभूम जिले के डूगरिया प्रखंड अंतर्गत पलसबनी गांव निवासी विश्वजय हांसदा की मौत हो गई।

विश्वजय हांसदा की मौत की खबर उनके परिवार तक पहुंचने के बाद गांव में मातम का माहौल है। राज्य सरकार और कंपनी प्रशासन की ओर से मृतक के परिजनों से लगातार संपर्क किया जा रहा है।

मृतक के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक उनके पैतृक गांव पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। कंपनी प्रशासन और परिजनों के साथ समन्वय के बाद पार्थिव शरीर को एंबुलेंस के माध्यम से झारखंड के लिए रवाना किया जा रहा है।

पांच झारखंडी मजदूर घायल

हादसे में झारखंड के पांच मजदूर घायल हुए हैं। घायलों में खूंटी जिले के तपकरा निवासी हाबिल गुड़िया, तोरपा निवासी निथिर भिंगरा और सुरुने निवासी दीना बेगरा शामिल हैं। इन तीनों मजदूरों को हल्की चोटें आई हैं।

वहीं, गुमला जिले के कटकाही निवासी विनोद रावना का दाहिना पैर टूट गया है। उन्हें अस्पताल में उपचार दिया जा रहा है।

पूर्वी सिंहभूम जिले के डूगरिया निवासी खेला राम बिसरा भी हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सभी घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है।

राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि घायलों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

एक झारखंडी मजदूर अब भी लापता

हादसे के बाद सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए बचाव अभियान लगातार जारी है। राज्य सरकार के मुताबिक, लापता मजदूरों में से एक के झारखंड का होने की पुष्टि हुई है।

हालांकि, उसकी सटीक पहचान और वर्तमान स्थिति की जानकारी जुटाने के लिए प्रशासन उत्तराखंड की राहत एवं बचाव टीमों के साथ लगातार संपर्क में है। परिवार को भी मजदूर के सुरक्षित बाहर निकलने की उम्मीद है।

बचाव अभियान में सुरंग के अंदर पानी और मलबे की स्थिति बड़ी चुनौती बनी हुई है। राहत दल सुरक्षित तरीके से सुरंग के अंदर पहुंच बनाने और फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

CM हेमंत सोरेन ने पुष्कर सिंह धामी से की बात

हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले को गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बातचीत की और झारखंड के मजदूरों की स्थिति की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद झारखंड श्रम विभाग और राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष को सक्रिय किया गया। अधिकारियों को उत्तराखंड प्रशासन, परियोजना प्रबंधन और प्रभावित मजदूरों के परिवारों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने को कहा गया है।

राज्य सरकार का प्रयास है कि हादसे में प्रभावित मजदूरों और उनके परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।

प्रवासी कंट्रोल रूम को किया गया सक्रिय

झारखंड सरकार की ओर से राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष के माध्यम से मामले की निगरानी की जा रही है। इसका उद्देश्य उत्तराखंड प्रशासन और झारखंड के संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखना है।

प्रवासी मजदूरों से जुड़ी किसी भी जानकारी, उनके स्वास्थ्य की स्थिति और रेस्क्यू ऑपरेशन की प्रगति को लेकर अधिकारियों से लगातार अपडेट लिया जा रहा है।

सरकार की प्राथमिकता लापता मजदूर को सुरक्षित बाहर निकालना और घायल मजदूरों को समुचित इलाज उपलब्ध कराना है।

मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता

हादसे में जान गंवाने वाले विश्वजय हांसदा के परिवार को कंपनी की ओर से अंतिम संस्कार के लिए तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा झारखंड सरकार की ओर से भी मृतक के परिवार को नियमानुसार सहायता दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

सरकार की ओर से मृतक के परिवार को पात्रता के अनुसार मुआवजा, बीमा राशि और अन्य वैधानिक सरकारी लाभ उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।

राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पीड़ित परिवार को सहायता प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

हादसे ने फिर खड़े किए सुरक्षा को लेकर सवाल

निर्माणाधीन सुरंगों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा हमेशा एक गंभीर विषय रहा है। चमोली की इस घटना ने भी सुरंग निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

पानी और मलबे के अचानक सुरंग में प्रवेश करने जैसी घटनाओं में मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में सुरंग निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन निकासी मार्ग, निगरानी प्रणाली और रेस्क्यू प्लान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

फिलहाल राहत और बचाव एजेंसियों का पूरा ध्यान सुरंग में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है।

परिवारों की नजर रेस्क्यू ऑपरेशन पर

चमोली हादसे में प्रभावित झारखंड के मजदूरों के परिवारों की नजर अब बचाव अभियान पर टिकी हुई है। एक परिवार अपने सदस्य को खो चुका है, पांच परिवार अपने घायल परिजनों के जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि एक परिवार अब भी अपने लापता सदस्य की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहा है।

झारखंड सरकार ने भरोसा दिलाया है कि राज्य के प्रभावित मजदूरों और उनके परिवारों को हर संभव मदद दी जाएगी। वहीं, उत्तराखंड में राहत और बचाव दल सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

फिलहाल सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि सुरंग में फंसे झारखंड के मजदूर समेत अन्य लापता श्रमिकों को जल्द सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाए और घायलों को बेहतर उपचार मिल सके।