नई दिल्ली। देश में छात्र आंदोलनों का दायरा अब नई पीढ़ी तक पहुंचता नजर आ रहा है। Gen-Z के आंदोलनों के बाद अब Gen Alpha के बच्चे भी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर राजस्थान और मध्य प्रदेश तक अलग-अलग जगहों पर स्कूली छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं।

इन प्रदर्शनों में बच्चों की मांगें अलग-अलग हैं। कहीं स्कूल तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क की मांग की जा रही है, तो कहीं जर्जर भवन, शिक्षकों की कमी, भोजन की गुणवत्ता और स्कूल को दूर स्थानांतरित किए जाने का विरोध हो रहा है।

कौन हैं Gen Alpha?

Gen Alpha आम तौर पर 2010 के बाद जन्मी पीढ़ी को कहा जाता है। हालांकि, अलग-अलग शोध संस्थानों में इसकी समय-सीमा को लेकर थोड़ा अंतर मिलता है। वर्तमान समय में इस पीढ़ी के बच्चे मुख्य रूप से स्कूल और शुरुआती किशोरावस्था में हैं।

तकनीक और इंटरनेट के दौर में पली-बढ़ी इस पीढ़ी के बच्चे अब अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर सार्वजनिक रूप से आवाज उठाते भी दिखाई दे रहे हैं।

हमीरपुर में तिरंगा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे बच्चे

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में स्कूल जाने के लिए पक्की सड़क की मांग को लेकर कक्षा एक से 12वीं तक के छात्र-छात्राएं अपने अभिभावकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। बच्चों के हाथों में तिरंगा था और उन्होंने प्रशासन के सामने गांव की खराब सड़क की समस्या रखी।

बच्चों का कहना था कि बरसात के दौरान रास्ता बेहद खराब हो जाता है, जिससे स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कई बार स्थिति ऐसी बन जाती है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

प्रशासन की ओर से बच्चों को सड़क निर्माण कराने का भरोसा दिया गया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ।

अलवर में जर्जर स्कूल की छत गिरने के बाद प्रदर्शन

राजस्थान के अलवर जिले के जोधावास क्षेत्र में स्कूल की जर्जर इमारत को लेकर छात्र-छात्राओं का विरोध सामने आया। बताया गया कि स्कूल भवन को पहले ही जर्जर घोषित किया जा चुका था।

12 अगस्त को जर्जर भवन की छत का एक हिस्सा गिर गया। घटना के वक्त वहां बच्चे मौजूद नहीं थे, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इसके बाद छात्रों ने स्कूल में सुरक्षा व्यवस्था और भवन की स्थिति को लेकर विरोध शुरू कर दिया।

मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षा विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।

लखनऊ में शिक्षकों की कमी के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्र

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी स्कूली छात्रों ने शिक्षकों की कमी को लेकर प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप था कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं और परीक्षा नजदीक होने के बावजूद पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो पाया है।

छात्रों ने स्कूल के सामने प्रदर्शन करते हुए कहा कि मुख्य विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं होने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्रों का दावा था कि शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।

मौके से गुजर रहे उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने छात्रों से बातचीत की और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से फोन पर जानकारी ली। छात्रों को शिक्षकों की तैनाती का आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।

कन्नौज में खाने की गुणवत्ता को लेकर छात्रों का विरोध

कन्नौज के जवाहर नवोदय विद्यालय अनौगी में भी छात्र-छात्राओं ने मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर विरोध जताया। 10वीं, 11वीं और 12वीं के छात्रों ने भोजन का बहिष्कार किया और हॉस्टल में रहकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

छात्रों का आरोप है कि मेस में लगातार खराब गुणवत्ता का भोजन दिया जा रहा है और शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया। मामले की जानकारी जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

उज्जैन में स्कूल शिफ्ट करने के विरोध में प्रदर्शन

मध्य प्रदेश के उज्जैन में सराफा स्कूल को दाऊदखेड़ी स्थानांतरित किए जाने के विरोध में छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना है कि नया स्कूल स्थान मौजूदा जगह से करीब 12 से 15 किलोमीटर दूर है।

छात्रों ने कहा कि इतनी दूर स्कूल जाने में रोजाना आने-जाने की परेशानी के साथ सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी रहेंगी। प्रदर्शन के दौरान दो छात्राओं के बेहोश होने की भी जानकारी सामने आई, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

छात्रों ने स्कूल को दाऊदखेड़ी स्थानांतरित नहीं करने की मांग करते हुए विरोध जारी रखा।

बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठ रही आवाज

Gen Alpha के इन प्रदर्शनों में एक बात समान दिखाई देती है—बेहतर और सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था की मांग। सड़क, स्कूल भवन, शिक्षक, भोजन और स्कूल की दूरी जैसे मुद्दे सीधे तौर पर बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा से जुड़े हैं।

Gen-Z के आंदोलनों के बाद Gen Alpha के बच्चों का इस तरह अपनी समस्याओं को लेकर सामने आना यह संकेत देता है कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे अब केवल अभिभावकों या शिक्षकों तक सीमित नहीं हैं। बच्चे भी अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने सीधे आवाज उठा रहे हैं।