रांची। राजधानी रांची का ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित जगन्नाथपुर मेला शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करने वाला यह मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ मनोरंजन और व्यापार का भी बड़ा केंद्र माना जाता है। इस बार भी मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और प्रशासन तथा मंदिर समिति व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटी है। हालांकि, इस बीच झूला संचालकों ने व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

झूला संचालकों का कहना है कि इस बार सरकारी बैरिकेडिंग और सीमित स्थान के कारण उन्हें झूले लगाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति ऐसी है कि कई संचालकों ने अभी तक अपने ट्रकों और अन्य वाहनों से झूलों का सामान भी नहीं उतारा है। उनका कहना है कि जब तक पर्याप्त जगह और स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिलते, तब तक स्थापना कार्य शुरू करना मुश्किल होगा।

सड़क से 15 फीट पीछे लगाने के निर्देश

झूला संचालकों के अनुसार, मंदिर समिति ने रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और रथ के सुचारु आवागमन को ध्यान में रखते हुए झूलों को सड़क से लगभग 15 फीट पीछे लगाने का निर्देश दिया है।

समिति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रथ यात्रा के समय सड़क पूरी तरह खाली रहे और किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

हालांकि, झूला संचालकों का कहना है कि सड़क से पीछे का हिस्सा समतल नहीं है। कई जगह गहरे गड्ढे और ऊबड़-खाबड़ जमीन है, जिसके कारण बड़े-बड़े झूलों की स्थापना सुरक्षित तरीके से नहीं हो पा रही है।

झूले लगाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं

संचालकों ने बताया कि केवल झूला लगाने की ही समस्या नहीं है, बल्कि सीढ़ियां बनाने, टिकट काउंटर स्थापित करने और सुरक्षा के लिए आवश्यक खाली जगह भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

बड़े झूलों के संचालन के लिए पर्याप्त खुला क्षेत्र आवश्यक होता है ताकि सुरक्षा मानकों का पालन किया जा सके।

यदि जगह कम होगी तो न केवल झूले लगाने में परेशानी होगी, बल्कि दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है।

इसी कारण अधिकांश संचालक मंदिर समिति के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।

कई राज्यों से पहुंचे झूले

हर वर्ष की तरह इस बार भी जगन्नाथपुर मेला देश के विभिन्न राज्यों से आए झूला संचालकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार, इस बार पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, असम, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड सहित कई राज्यों से 50 से अधिक झूले रांची पहुंच चुके हैं।

हालांकि, इनमें से लगभग 30 प्रमुख झूलों को ही मेले में लगाया जाएगा।

बाकी झूलों की स्थापना स्थान की उपलब्धता और प्रशासनिक अनुमति पर निर्भर करेगी।

ये होंगे मेले के मुख्य आकर्षण

जगन्नाथपुर मेला अपने धार्मिक आयोजन के साथ-साथ मनोरंजन के लिए भी प्रसिद्ध है।

इस बार मेले में कई आधुनिक और रोमांचक झूले लगाए जाने की तैयारी है।

मुख्य आकर्षणों में शामिल हैं—

  • ब्रेक डांस
  • सुनामी राइड
  • क्रेजी बी
  • स्काई टावर
  • डांसिंग फ्लाई
  • नाव झूला
  • मौत का कुआं

इन झूलों का आनंद लेने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में युवा, बच्चे और परिवार मेले में पहुंचते हैं।

टिकट दरों में नहीं होगा बदलाव

मेले में आने वाले लोगों के लिए राहत की खबर यह है कि इस वर्ष झूलों के टिकट की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।

झूला संचालकों ने बताया कि पिछले वर्ष जो टिकट दरें निर्धारित थीं, इस बार भी वही लागू रहेंगी।

इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को मनोरंजन का अवसर उपलब्ध कराना है।

इस बार रिकॉर्ड कीमत में हुआ मेला का टेंडर

जगन्नाथपुर मेला इस वर्ष आर्थिक रूप से भी चर्चा में है।

जानकारी के अनुसार, इस बार मेले का टेंडर लगभग 2 करोड़ 27 लाख रुपये में हुआ है।

पिछले वर्ष यही टेंडर लगभग 56 लाख रुपये में हुआ था।

यानी इस बार टेंडर राशि में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मेले की बढ़ती लोकप्रियता, व्यावसायिक गतिविधियों और बेहतर सुविधाओं की अपेक्षा के कारण टेंडर राशि में यह बड़ा इजाफा हुआ है।

प्रशासन और समिति पर टिकी निगाहें

झूला संचालकों का कहना है कि वे मंदिर समिति और प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में हैं।

उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही जगह से संबंधित समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा ताकि समय पर सभी झूलों की स्थापना पूरी की जा सके।

यदि जल्द फैसला नहीं हुआ तो कई झूले समय पर चालू नहीं हो पाएंगे, जिससे संचालकों के साथ-साथ मेले में आने वाले लोगों को भी निराशा हो सकती है।

रथ यात्रा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर जोर

मंदिर समिति का कहना है कि रथ यात्रा जगन्नाथपुर मेले का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है।

इस दौरान हजारों श्रद्धालु रथ खींचने और भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

ऐसे में सड़क पूरी तरह खाली रखना और भीड़ प्रबंधन करना प्रशासन की प्राथमिकता है।

इसी उद्देश्य से झूलों की स्थापना को लेकर नए निर्देश जारी किए गए हैं।

श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ेगी भीड़

हर वर्ष जगन्नाथपुर मेला झारखंड के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में शामिल होता है।

रांची ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।

मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के अलावा स्थानीय हस्तशिल्प, खान-पान, पारंपरिक वस्तुएं और मनोरंजन के अनेक साधन लोगों को आकर्षित करते हैं।

प्रशासन को इस बार भी लाखों लोगों के आने की उम्मीद है।

संचालकों की मांग

झूला संचालकों ने प्रशासन और मंदिर समिति से मांग की है कि उन्हें समतल और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाए।

साथ ही बैरिकेडिंग की व्यवस्था इस तरह की जाए कि रथ यात्रा भी प्रभावित न हो और झूलों का संचालन भी सुरक्षित तरीके से किया जा सके।

उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान निकलता है तो दो से तीन दिनों के भीतर सभी झूले तैयार कर दिए जाएंगे।

निष्कर्ष

रांची का ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मेला एक बार फिर श्रद्धा, संस्कृति और मनोरंजन का संगम बनने जा रहा है। हालांकि, इस बार झूला संचालकों के सामने जगह और बैरिकेडिंग की समस्या एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। प्रशासन और मंदिर समिति यदि समय रहते समाधान निकाल लेते हैं, तो श्रद्धालु और पर्यटक बिना किसी परेशानी के मेले का आनंद उठा सकेंगे। वहीं, टिकट दरों में कोई बढ़ोतरी न होने से इस बार भी लोग पुराने शुल्क पर रोमांचक झूलों का आनंद ले सकेंगे।