पटना: बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में आज एक महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। इस मामले में दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर 30 जून को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। वहीं, मामला अब राष्ट्रपति भवन तक भी पहुंच चुका है। राष्ट्रपति सचिवालय ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए बिहार के मुख्य सचिव को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस घटनाक्रम के बाद मामले ने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नई गंभीरता हासिल कर ली है।

सुप्रीम कोर्ट में होगी अहम सुनवाई

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ सुनवाई करेगी। याचिका में कथित मुठभेड़ की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

याचिका दायर करने वाले पक्ष का कहना है कि मामले की जांच राज्य एजेंसियों के बजाय केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात की आशंका न रहे।

राष्ट्रपति सचिवालय ने लिया संज्ञान

इस मामले में एक बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह द्वारा 24 जून को राष्ट्रपति सचिवालय को भेजे गए ईमेल पर कार्रवाई की गई।

राष्ट्रपति सचिवालय ने बिहार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि जांच रिपोर्ट की प्रति शिकायतकर्ता को भी उपलब्ध कराई जाए।

संजीव कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने ईमेल के माध्यम से एफआईआर में नामजद सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की थी, जिस पर राष्ट्रपति सचिवालय ने संज्ञान लेते हुए आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

CBI जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी ने भी याचिका दाखिल कर मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है।

याचिका में प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

  • पूरे मामले की CBI से स्वतंत्र जांच कराई जाए।
  • सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में विशेषज्ञ समिति गठित की जाए।
  • एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
  • जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से कराई जाए।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि भरत भूषण तिवारी की मौत एक कथित फर्जी एनकाउंटर का मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच न्यायहित में आवश्यक है।

17 जून को हुआ था कथित एनकाउंटर

भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी। घटना के बाद से ही इसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

परिजनों का आरोप है कि यह वास्तविक मुठभेड़ नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है, जबकि पुलिस अपनी कार्रवाई को वैधानिक बता रही है। इसी विवाद के चलते मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आईं अहम बातें

एनकाउंटर के कई दिनों बाद सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि भरत तिवारी के शरीर में कुल पांच गोलियां लगी थीं।

रिपोर्ट के अनुसार—

  • पहली गोली बाईं जांघ के ऊपरी हिस्से में सामने की ओर लगी।
  • दूसरी गोली बाईं जांघ के मध्य भाग के अंदरूनी हिस्से में मिली।
  • तीसरी गोली दाईं जांघ के बीच वाले हिस्से में लगी।
  • चौथी गोली दाईं जांघ के बाहरी हिस्से से अंदर की ओर गई।
  • पांचवीं गोली बाएं पैर के मध्य भाग में पीछे की तरफ लगी थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले को लेकर कई नए सवाल खड़े हुए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग और तेज हो गई है।

न्यायिक जांच पहले ही हो चुकी है घोषित

भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बढ़ते विवाद के बीच बिहार सरकार पहले ही इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे चुकी है।

सरकार की ओर से कहा गया है कि यदि जांच में कोई भी अधिकारी या पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि मृतक का परिवार अब भी न्यायिक जांच से संतुष्ट नहीं है और लगातार CBI जांच की मांग पर कायम है।

राजनीतिक और कानूनी बहस जारी

यह मामला अब केवल एक पुलिस एनकाउंटर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन चुका है। राष्ट्रपति सचिवालय के हस्तक्षेप, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और CBI जांच की मांग ने इस पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आगे आने वाले न्यायिक निर्देशों पर टिकी हैं।