लातेहार। झारखंड के ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में शामिल पलामू किला अब नए नियमों के तहत पर्यटकों के लिए खुलेगा। पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) प्रशासन ने वन्यजीवों की सुरक्षा और जंगल की शांति बनाए रखने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लेते हुए पलामू किला क्षेत्र में बाइक से प्रवेश पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही अब बेतला राष्ट्रीय उद्यान, पलामू किला और आसपास के संवेदनशील वन क्षेत्रों में भ्रमण केवल अधिकृत गाइड की मौजूदगी में ही किया जा सकेगा।
यह निर्णय हाल ही में सामने आए एक वायरल वीडियो के बाद लिया गया, जिसमें कुछ पर्यटक प्रतिबंधित वन क्षेत्र में बाइक लेकर पहुंचे और हिरण का पीछा करते हुए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया।
सोशल मीडिया रील के लिए जंगल में घुसना पड़ा भारी
आज के दौर में सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ कई बार लोगों को नियमों की अनदेखी करने पर मजबूर कर देती है। पलामू टाइगर रिजर्व में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां कुछ युवक बाइक लेकर प्रतिबंधित वन क्षेत्र में प्रवेश कर गए।
इतना ही नहीं, उन्होंने जंगल में मौजूद एक हिरण का पीछा करते हुए वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद वन्यजीव प्रेमियों, पर्यावरणविदों और आम नागरिकों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां न केवल वन्यजीवों को तनाव में डालती हैं बल्कि उनके प्राकृतिक व्यवहार और आवास को भी प्रभावित करती हैं।
PTR प्रशासन ने लिया सख्त फैसला
घटना की गंभीरता को देखते हुए पलामू टाइगर रिजर्व प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नए नियम लागू कर दिए।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अब पलामू किला क्षेत्र में किसी भी पर्यटक को बाइक लेकर प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी।
प्रशासन का कहना है कि जंगल मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक और सुरक्षित आवास है। यदि सोशल मीडिया के लिए बनाई जाने वाली रीलें जंगल की शांति और वन्यजीवों की सुरक्षा को प्रभावित करेंगी, तो ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
अब बिना गाइड नहीं मिलेगा प्रवेश
नए नियमों के अनुसार अब पर्यटक अकेले जंगल क्षेत्र में नहीं घूम सकेंगे।
बेतला राष्ट्रीय उद्यान, पलामू किला और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश केवल अधिकृत गाइड के साथ ही संभव होगा।
गाइड न केवल पर्यटकों को सही मार्ग दिखाएंगे बल्कि उन्हें वन्यजीवों की सुरक्षा, जंगल के नियमों और संवेदनशील क्षेत्रों की जानकारी भी देंगे।
इससे पर्यटकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और वन्यजीवों को भी अनावश्यक परेशानियों से बचाया जा सकेगा।
क्यों जरूरी था यह फैसला?
पलामू टाइगर रिजर्व देश के महत्वपूर्ण बाघ अभयारण्यों में से एक है।
यहां बाघ, हाथी, तेंदुआ, भालू, बाइसन, हिरण और कई दुर्लभ पक्षियों सहित अनेक वन्यजीव रहते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाइक और अन्य निजी वाहनों का तेज शोर वन्यजीवों के व्यवहार को प्रभावित करता है।
अचानक शोर होने पर जानवर घबरा जाते हैं, अपने प्राकृतिक आवास छोड़ देते हैं या आक्रामक भी हो सकते हैं।
कई बार ऐसे हालात पर्यटकों के लिए भी खतरा बन जाते हैं।
इसी कारण जंगलों में नियंत्रित पर्यटन को बढ़ावा देने और अनावश्यक आवाजाही रोकने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
680 एकड़ में फैली है ऐतिहासिक धरोहर
पलामू किला झारखंड की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में गिना जाता है।
करीब 680 एकड़ क्षेत्र में फैले इस किले का निर्माण 16वीं-17वीं शताब्दी में चेरो वंश के राजा प्रताप राय ने कराया था।
बाद में राजा मेदिनी राय ने इसका विस्तार कराया और इसे और मजबूत बनाया।
इतिहास, स्थापत्य कला और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा संगम होने के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
बेतला राष्ट्रीय उद्यान घूमने आने वाले अधिकांश पर्यटक पलामू किला भी देखने जरूर जाते हैं।
पर्यटन और संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी
पलामू किला केवल ऐतिहासिक स्थल नहीं बल्कि एक संवेदनशील वन क्षेत्र के बीच स्थित है।
ऐसे में यहां पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है।
वन अधिकारियों का कहना है कि यदि पर्यटन अनियंत्रित हो जाए तो इसका सीधा असर वन्यजीवों और पर्यावरण पर पड़ता है।
इसलिए अब नियंत्रित और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा।
PTR निदेशक ने क्या कहा?
पलामू टाइगर रिजर्व के निदेशक प्रवेश कांत जेना ने बताया कि यह निर्णय पर्यटकों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।
उन्होंने कहा कि जंगल में अनधिकृत रूप से बाइक या अन्य निजी वाहन लेकर प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी।
उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि वे जंगल की शांति बनाए रखें, कचरा न फैलाएं, वन्यजीवों को परेशान न करें और सभी नियमों का पालन करें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जिम्मेदार पर्यटन की ओर बढ़ता कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल प्रतिबंध लगाने के लिए नहीं बल्कि जिम्मेदार पर्यटन (Responsible Tourism) को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है।
दुनिया के कई राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व में भी पर्यटकों की संख्या, वाहन और गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण रखा जाता है ताकि वन्यजीवों का प्राकृतिक जीवन प्रभावित न हो।
झारखंड में भी अब इसी दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
पर्यटकों के लिए नई गाइडलाइन
नए नियमों के तहत पर्यटकों को कुछ महत्वपूर्ण बातों का पालन करना होगा—
- बाइक या निजी वाहन लेकर प्रतिबंधित वन क्षेत्र में प्रवेश नहीं मिलेगा।
- अधिकृत गाइड के साथ ही जंगल और पलामू किला क्षेत्र का भ्रमण किया जा सकेगा।
- वन्यजीवों का पीछा करना, उन्हें खाना खिलाना या परेशान करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
- जंगल में तेज आवाज, म्यूजिक या सोशल मीडिया रील बनाने के लिए जोखिमपूर्ण गतिविधियों से बचना होगा।
- प्लास्टिक और अन्य कचरा फैलाने पर कार्रवाई की जा सकती है।
- सभी पर्यटकों को वन विभाग के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी मजबूती
वन विभाग का मानना है कि नए नियम लागू होने से पलामू टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों का प्राकृतिक वातावरण सुरक्षित रहेगा।
साथ ही पर्यटक भी अधिक सुरक्षित तरीके से ऐतिहासिक पलामू किला और बेतला राष्ट्रीय उद्यान का आनंद ले सकेंगे।
प्रशासन को उम्मीद है कि इन नियमों से पर्यटन अधिक अनुशासित, पर्यावरण के अनुकूल और वन्यजीव संरक्षण के अनुरूप संचालित होगा।
निष्कर्ष
पलामू टाइगर रिजर्व प्रशासन का यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि सोशल मीडिया की लोकप्रियता से अधिक महत्वपूर्ण जंगल, वन्यजीव और प्राकृतिक विरासत की सुरक्षा है। बाइक से प्रवेश पर प्रतिबंध और गाइड की अनिवार्यता जैसे कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देंगे, बल्कि आने वाले समय में पलामू किला और बेतला क्षेत्र को जिम्मेदार पर्यटन का बेहतर उदाहरण भी बना सकते हैं। अब जरूरत है कि पर्यटक भी इन नियमों का सम्मान करें और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर पर्यटन का आनंद लें।