रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी रांची स्थित CID मुख्यालय पहुंचे, जहां विशेष जांच दल (SIT) ने उनसे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ की। इससे पहले मंगलवार को भी उनसे करीब आठ घंटे तक लंबी पूछताछ की गई थी।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा संचालन और परीक्षा से जुड़ी एजेंसियों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है। इस मामले को झारखंड की सबसे चर्चित भर्ती जांचों में से एक माना जा रहा है।

दूसरे दिन भी जारी रही पूछताछ

नोटिस मिलने के बाद एल. खियांग्ते मंगलवार को पहली बार CID कार्यालय पहुंचे थे। वहां देर शाम तक चली पूछताछ के दौरान जांच अधिकारियों ने उनसे भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा संचालन से जुड़े कई सवाल पूछे। बुधवार को उन्हें फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया, जिसके बाद वे दोबारा CID मुख्यालय पहुंचे।

सूत्रों के मुताबिक, पहले दिन हुई पूछताछ के दौरान उनका पासपोर्ट भी जब्त किए जाने की चर्चा रही। हालांकि, इस संबंध में CID की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

SIT ने चयन प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका पर किए सवाल

जांच के दौरान विशेष जांच दल (SIT) ने एल. खियांग्ते से कई अहम बिंदुओं पर जानकारी मांगी। पूछताछ में विशेष रूप से यह जानने का प्रयास किया गया कि कथित तौर पर ब्लैकलिस्टेड कंपनी के चयन में उनकी क्या भूमिका थी।

इसके अलावा अधिकारियों ने यह भी पूछा कि परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) के तत्कालीन मार्केटिंग मैनेजर और वर्तमान में खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत अभय तिवारी से उनके क्या संबंध थे।

SIT ने उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के तबादले के बाद भी JPSC में कार्यरत रहने से जुड़े मामलों पर भी उनसे सवाल किए।

21 जुलाई को दिया था इस्तीफा

भर्ती अनियमितताओं की जांच के बीच एल. खियांग्ते ने 21 जुलाई 2026 को JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद आयोग का अध्यक्ष पद फिलहाल रिक्त है।

अध्यक्ष का पद खाली होने के कारण आयोग की कई प्रशासनिक और परीक्षा संबंधी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। नियमों के अनुसार अध्यक्ष की नियुक्ति के बिना आयोग नई परीक्षाओं के आयोजन और कई महत्वपूर्ण निर्णयों में सीमित हो जाता है।

नए अध्यक्ष की नियुक्ति पर सरकार का मंथन

सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार JPSC के नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर मंथन कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि 6 अगस्त 2026 से पहले नए अध्यक्ष की नियुक्ति की जा सकती है या तब तक किसी वरिष्ठ IAS अधिकारी को आयोग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जा सकता है।

सरकार ऐसे अनुभवी सेवानिवृत्त IAS, IPS या IFS अधिकारी की तलाश में है, जो आयोग की जिम्मेदारी संभाल सकें और लंबित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ा सकें।

पहले भी पांच महीने खाली रहा था अध्यक्ष पद

गौरतलब है कि इससे पहले डॉ. मेरी नीलिमा केरकेट्टा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी JPSC अध्यक्ष का पद करीब पांच महीने तक खाली रहा था। इसके बाद एल. खियांग्ते ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी।

अब उनके इस्तीफे के बाद आयोग एक बार फिर नेतृत्वविहीन हो गया है, जिससे नई परीक्षाओं और परिणामों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

मानसून सत्र से पहले बढ़ा राजनीतिक दबाव

6 अगस्त से शुरू होने वाले झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष JPSC भर्ती अनियमितता का मुद्दा जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। इसे देखते हुए राज्य सरकार भी आयोग में जल्द नियुक्ति और जांच प्रक्रिया को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर रही है।

राजनीतिक हलकों में भी इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनी हुई है।

जांच पर टिकी अभ्यर्थियों की नजर

JPSC भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें अब CID जांच पर टिकी हुई हैं। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी होगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।