रांची: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक हाथ लगी है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य और ₹1 करोड़ के इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सुनिर्मल उर्फ सागर को गिरिडीह जिले से गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके साथ माओवादी संगठन की रीजनल कमेटी के सदस्य मोछू उर्फ मेहनत उर्फ विभीषण उर्फ कुंबा मुर्मू तथा सक्रिय सदस्य गौरव उर्फ सौरभ को भी सुरक्षाबलों ने गिरफ्तार किया है।
मंगलवार देर शाम कोबरा, सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने धनबाद-गिरिडीह सीमा क्षेत्र में सटीक खुफिया सूचना के आधार पर विशेष अभियान चलाकर यह बड़ी कार्रवाई की। अभियान के दौरान दो ग्रामीणों को भी हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है।
डेढ़ दशक से था माओवादी नेटवर्क का रणनीतिकार
गिरफ्तार मिसिर बेसरा मूल रूप से गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के मदनडीह गांव का निवासी है। वह माओवादी संगठन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई पोलित ब्यूरो का सदस्य था और झारखंड, पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा में पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय तक माओवादी गतिविधियों का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा।
सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान के घने जंगलों में माओवादी संगठन को मजबूत करने, हथियारबंद दस्तों के संचालन, नए कैडरों की भर्ती, लेवी वसूली तथा विभिन्न जोनों के बीच समन्वय स्थापित करने में उसकी अहम भूमिका रही है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसने सुरक्षा बलों पर कई बड़े हमलों की योजना भी तैयार की थी।
15 लाख का इनामी मोछू भी गिरफ्तार
सुरक्षा बलों ने मिसिर बेसरा के साथ धनबाद जिले के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के घोड़ाबांधा गांव निवासी मोछू उर्फ मेहनत उर्फ विभीषण उर्फ कुंबा मुर्मू को भी गिरफ्तार किया है। वह माओवादी संगठन की रीजनल कमेटी का सदस्य था और झारखंड सरकार ने उस पर ₹15 लाख का इनाम घोषित कर रखा था।
मोछू लंबे समय से मिसिर बेसरा का करीबी सहयोगी माना जाता था। वह सारंडा और पोड़ाहाट क्षेत्र में संगठन के संचालन, लेवी वसूली, कैडर प्रबंधन और अभियानों के समन्वय में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
सक्रिय सदस्य गौरव उर्फ सौरभ भी दबोचा गया
कार्रवाई के दौरान माओवादी संगठन के सक्रिय सदस्य गौरव उर्फ सौरभ को भी गिरफ्तार किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां उससे संगठन के नेटवर्क, हथियारों के ठिकानों और अन्य फरार माओवादियों के संबंध में पूछताछ कर रही हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि
मिसिर बेसरा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। उसके खिलाफ हत्या, पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले, आईईडी विस्फोट, हथियार लूट, लेवी वसूली और आपराधिक साजिश से जुड़े कई मामले विभिन्न राज्यों में दर्ज हैं।
वह लगातार अपना ठिकाना बदलकर झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती जंगलों में सक्रिय रहता था, जिससे उसकी गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई थी।
पूछताछ में खुल सकते हैं कई बड़े राज
सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि तीनों माओवादियों से पूछताछ के दौरान संगठन के हथियारों के ठिकानों, आईईडी नेटवर्क, लेवी तंत्र, वित्तीय स्रोत, शहरी नेटवर्क और फरार माओवादी नेताओं से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं। इन जानकारियों के आधार पर आने वाले दिनों में सारंडा, कोल्हान, गिरिडीह और सीमावर्ती इलाकों में नक्सल विरोधी अभियान और तेज होने की संभावना है।
अधिकारियों का मानना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। इससे संगठन की सैन्य और रणनीतिक क्षमता को गहरा झटका लगेगा और झारखंड में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में सुरक्षा बलों को निर्णायक बढ़त मिलेगी। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई के बाद झारखंड में सक्रिय माओवादियों की संख्या घटकर लगभग 17 रह गई है।
गिरफ्तार माओवादी
मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सुनिर्मल उर्फ सागर
निवासी: मदनडीह, थाना पीरटांड़, जिला गिरिडीह
पद: पोलित ब्यूरो सदस्य
इनाम: ₹1 करोड़
मोछू उर्फ मेहनत उर्फ विभीषण उर्फ कुंबा मुर्मू
निवासी: घोड़ाबांधा, थाना बरवाअड्डा, जिला धनबाद
पद: रीजनल कमेटी सदस्य
इनाम: ₹15 लाख
गौरव उर्फ सौरभ
पद: माओवादी संगठन का सक्रिय सदस्य