रांची: झारखंड में जानलेवा हमला और मारपीट से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री बंधु तिर्की और छह अन्य आरोपियों को एमपी / एमएलए कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। यह फैसला विशेष न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा की अदालत ने सुनाया।

18 मार्च को कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। इस केस में बंधु तिर्की के अलावा तीन बॉडीगार्ड रामदेव प्रसाद, विशाल उरांव, सीनू राम जोंको, तथा अमोद कुमार सिंह, मोहन सिंह, और दिलीप कुमार ट्रायल का सामना कर रहे थे।


मामला क्या था?

यह मामला 1 नवंबर 2017 का है। घटना उस समय हुई थी जब भारत स्काउट एंड गाइड्स, झारखंड के राज्य काउंसिल चुनाव में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान शिकायतकर्ता नरेश कुमार को बैठक में जाने से रोका गया और उन पर मारपीट की गई।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उनका जांच में शामिल होना आवश्यक था, लेकिन उन्हें कथित तौर पर बंधु तिर्की और उनके अंगरक्षकों ने रोक लिया। इस घटना के संबंध में कोतवाली थाने में प्राथमिकी 298 / 2017 दर्ज की गई थी।


आरोप और घटनाक्रम

आरोपियों पर लगे मुख्य आरोप:

  • जानलेवा हमला कर रॉड से मारपीट करना
  • गाली-गलौज करना
  • बंधु तिर्की के तीन अंगरक्षकों द्वारा कॉलर पकड़कर शरीर पर कट्टा रखकर जान से मारने की धमकी देना
  • शिकायतकर्ता से गले की चेन छीन लेना

हालांकि कोर्ट ने मामले की जांच के दौरान यह पाया कि साक्ष्यों के अभाव में आरोप साबित नहीं हुए, इसलिए सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया गया।