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Digital Census 2026: देश में पहली बार डिजिटल जनगणना, जानकारी न देने पर हो सकती है जेल

Digital Census 2026 के तहत देशभर में पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना होगी। जानकारी देना अनिवार्य, गलत सूचना पर 3 साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान।

देशभर में पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना (Digital Census 2026) कराई जाएगी। यह प्रक्रिया पूरी तरह तकनीक आधारित होगी और इसमें भाग लेना हर नागरिक के लिए कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना अधिनियम 1948 (संशोधित नियम 1990) के तहत जानकारी देने से इनकार या गलत सूचना देने पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल, एक हजार रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

यह कदम देश में पारदर्शी और सटीक डेटा संग्रह की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।


📅 दो चरणों में होगी जनगणना

Digital Census 2026 दो चरणों में संपन्न होगी:

🏠 पहला चरण (1 अप्रैल 2026 – 30 सितंबर 2026)

  • मकान सूचीकरण

  • मूलभूत सुविधाओं से जुड़े 33 प्रश्न

  • घर की स्थिति, पानी, बिजली, शौचालय आदि की जानकारी

👨‍👩‍👧 दूसरा चरण (फरवरी 2027 से)

  • नाम

  • उम्र

  • लिंग

  • धर्म

  • जाति

  • अन्य व्यक्तिगत विवरण

दूसरे चरण में व्यक्तिगत जानकारी दर्ज की जाएगी, जो सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्धारण में अहम भूमिका निभाएगी।


📱 मोबाइल ऐप से होगा डेटा संग्रह

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से होगी।

  • हर 1000 लोगों पर एक सरकारी प्रगणक तैनात रहेगा।

  • प्रगणक घर-घर जाकर मोबाइल ऐप से डेटा संग्रह करेंगे।

  • पहले डेटा ऑफलाइन एकत्र किया जाएगा।

  • बाद में उसे ऑनलाइन सिस्टम पर अपलोड किया जाएगा।

इससे प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने का प्रयास किया जा रहा है।


🆔 प्रगणक की पहचान कैसे होगी?

सरकार ने नागरिकों की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए विशेष व्यवस्था की है:

  • प्रगणक सरकारी कर्मचारी होंगे।

  • संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार द्वारा जारी पहचान पत्र (ID Card) उनके पास होगा।

  • तय प्रारूप में जारी आईडी कार्ड दिखाना अनिवार्य होगा।

  • जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों को अतिरिक्त मानदेय भी दिया जाएगा।

नागरिकों को सलाह दी गई है कि जानकारी देने से पहले प्रगणक का पहचान पत्र अवश्य जांच लें।


⚖ जानकारी देना क्यों अनिवार्य है?

जनगणना अधिनियम 1948 एवं नियम 1990 की धारा 11 के तहत जनगणना में पूछे गए प्रश्नों का सही जवाब देना हर नागरिक की कानूनी जिम्मेदारी है।

33 सवालों और मकान सूचीकरण से जुड़े प्रश्नों के जवाब देना अनिवार्य है। यह डेटा देश की विकास योजनाओं, बजट निर्धारण और संसाधनों के वितरण में आधार बनता है।


🚨 गलत जानकारी देने पर क्या होगी कार्रवाई?

यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत सूचना देता है या जानकारी देने से इनकार करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

संभावित सजा:

  • तीन साल तक की कैद

  • एक हजार रुपए तक जुर्माना

  • या दोनों

सरकार ने स्पष्ट किया है कि गलत सूचना देने वालों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।


🔐 डिजिटल डेटा कितना सुरक्षित रहेगा?

डिजिटल जनगणना को लेकर नागरिकों में डेटा सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सरकार के अनुसार:

  • एकत्रित जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रखी जाएगी।

  • डेटा किसी व्यक्ति विशेष के साथ साझा नहीं किया जाएगा।

  • बेंगलुरु, लखनऊ और नई दिल्ली में तीन डेटा सेंटर स्थापित किए गए हैं।

  • डेटा तक केवल अधिकृत अधिकारी ही पहुंच सकेंगे।

इससे नागरिकों की निजी जानकारी की गोपनीयता सुनिश्चित की जाएगी।


📊 Digital Census 2026 क्यों है अहम?

  • योजनाओं का सही लाभ सही लोगों तक पहुंचाने में मदद

  • संसाधनों का बेहतर वितरण

  • जनसंख्या आधारित नीतियों का निर्माण

  • विकास योजनाओं की सटीक योजना

डिजिटल प्रणाली से त्रुटियों में कमी और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।


❓ आपके मन में सवाल?

  • क्या जनगणना के दौरान आधार कार्ड जरूरी होगा?

  • क्या ऑनलाइन खुद से भी डेटा भरा जा सकेगा?

  • क्या डेटा भविष्य में सार्वजनिक होगा?

ऐसे कई सवालों के जवाब सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों में स्पष्ट किए जाएंगे।


🗣 आपकी राय क्या है?

क्या आपको लगता है कि Digital Census 2026 से देश में पारदर्शिता बढ़ेगी?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं

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