रांची। झारखंड में इस वर्ष कमजोर मानसून और सामान्य से कम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के कई जिलों में बारिश की कमी के कारण खेत सूखे पड़े हैं और खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होने लगी है। इसी बीच डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JKLM) के सुप्रीमो जयराम महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य में संभावित सुखाड़ (सूखा) की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

अपने पत्र में जयराम महतो ने कहा कि यदि समय रहते सरकार ने प्रभावी कदम नहीं उठाए तो आने वाले दिनों में झारखंड के किसान, कृषि मजदूर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था गंभीर संकट का सामना कर सकते हैं। उन्होंने सरकार से मजबूत कृषि नीति, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, जल संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को प्राथमिकता देने की मांग की है।

कमजोर मानसून से बढ़ी किसानों की चिंता

जयराम महतो ने अपने पत्र में लिखा कि झारखंड की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर आधारित है और राज्य की अधिकांश खेती आज भी प्राकृतिक वर्षा पर निर्भर करती है। ऐसे में यदि मानसून कमजोर रहता है तो इसका सीधा असर धान सहित खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन पर पड़ना तय है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष मानसून की शुरुआत उम्मीद के अनुरूप नहीं रही है और कई क्षेत्रों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। इससे किसानों के सामने खेती शुरू करने का संकट खड़ा हो गया है।

"100 वर्षों में सबसे कम बारिश वाला पांचवां जून"

जयराम महतो ने अपने पत्र में एक महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष का जून पिछले 100 वर्षों में सबसे कम बारिश वाले पांच जून महीनों में शामिल रहा है।

उन्होंने कहा कि बारिश की इस कमी को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि संभावित संकट को देखते हुए अभी से तैयारी शुरू की जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।

सिंचाई सुविधाओं की कमी बनी बड़ी चुनौती

पत्र में जयराम महतो ने झारखंड की सिंचाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में सिंचाई योग्य भूमि का बड़ा हिस्सा आज भी सिंचाई सुविधाओं से वंचित है।

उनका कहना है कि आधे से अधिक कृषि भूमि पर सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान पूरी तरह मानसून पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में बारिश कम होने का सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ता है।

उन्होंने सरकार से नई सिंचाई योजनाओं को तेजी से लागू करने तथा बंद पड़ी परियोजनाओं को जल्द पूरा करने की मांग की।

खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ रहा असर

कम बारिश का असर राज्य में खरीफ सीजन की खेती पर साफ दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में किसान अभी तक धान की रोपाई शुरू नहीं कर पाए हैं, जबकि कुछ स्थानों पर बीज बोने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिलने से फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

जयराम महतो ने कहा कि यदि जुलाई और अगस्त में भी सामान्य बारिश नहीं हुई तो राज्य में धान उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिसका असर खाद्यान्न उत्पादन और किसानों की आय दोनों पर पड़ेगा।

ग्रामीण मजदूरों पर भी पड़ेगा सीधा प्रभाव

उन्होंने अपने पत्र में कहा कि सूखे का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले खेतिहर और गैर-खेतिहर मजदूर भी इससे प्रभावित होंगे।

खेती कम होने से कृषि कार्य घटेंगे और मजदूरों को रोजगार नहीं मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ने के साथ-साथ आर्थिक संकट भी गहरा सकता है।

उन्होंने सरकार से मनरेगा और अन्य रोजगार योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की भी मांग की।

खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग

जयराम महतो ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि यदि सूखे की स्थिति बनती है तो गरीब और कमजोर वर्गों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को मजबूत किया जाए और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसी भी परिवार को खाद्यान्न संकट का सामना न करना पड़े।

जल संरक्षण पर देना होगा विशेष जोर

पत्र में उन्होंने कहा कि हर वर्ष बारिश की कमी को केवल प्राकृतिक आपदा मानकर राहत कार्य चलाना पर्याप्त नहीं होगा।

सरकार को दीर्घकालिक योजना बनानी होगी, जिसमें—

  • वर्षा जल संचयन,
  • तालाबों और जलाशयों का पुनर्जीवन,
  • छोटे सिंचाई प्रोजेक्ट,
  • चेक डैम निर्माण,
  • जल संरक्षण अभियान

जैसे उपायों को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में सूखे की स्थिति से काफी हद तक बचा जा सकता है।

सरकार से व्यापक कार्ययोजना बनाने की अपील

जयराम महतो ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि राज्य सरकार केवल राहत पैकेज तक सीमित न रहे, बल्कि कृषि और ग्रामीण विकास को केंद्र में रखकर व्यापक नीति तैयार करे।

उन्होंने सुझाव दिया कि कृषि वैज्ञानिकों, मौसम विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर संभावित सुखाड़ से निपटने की रणनीति तैयार की जाए।

साथ ही किसानों को समय पर बीज, उर्वरक, सिंचाई सहायता और तकनीकी सलाह उपलब्ध कराई जाए।

आने वाले दिनों पर टिकी निगाहें

फिलहाल झारखंड में मानसून की स्थिति पर किसानों, कृषि विशेषज्ञों और सरकार की नजर बनी हुई है। यदि आगामी दिनों में अच्छी बारिश होती है तो हालात सामान्य हो सकते हैं, लेकिन बारिश में लगातार कमी बनी रहने पर राज्य के कई हिस्सों में खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।

ऐसे में जयराम महतो द्वारा उठाया गया यह मुद्दा राज्य में कृषि, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास को लेकर नई बहस का विषय बन गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार संभावित सूखे की आशंका को लेकर क्या कदम उठाती है और किसानों को राहत देने के लिए कौन-कौन सी योजनाएं लागू करती है।