रांची। राजधानी रांची के टाटीसिलवे थाना क्षेत्र स्थित मानकी ढीपा रिंग रोड पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सड़क दुर्घटना में 30 वर्षीय रंजीत बैठा की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद शव को घटनास्थल पर रखकर करीब साढ़े चार घंटे तक रिंग रोड जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने मृतक के परिजनों के लिए 30 लाख रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, घटनास्थल पर अंडरपास और स्पीड ब्रेकर के निर्माण सहित कई मांगें प्रशासन के सामने रखीं।

लगातार बारिश के बावजूद ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। देर शाम प्रशासन की ओर से तत्काल सहायता राशि और मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने के आश्वासन के बाद जाम समाप्त हुआ। इस दौरान रिंग रोड के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

कंटेनर की चपेट में आने से हुई थी मौत

जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम रंजीत बैठा स्कूटी से रिंग रोड पार कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रहे एक कंटेनर ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भीषण था कि रंजीत गंभीर रूप से घायल हो गए।

स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें पहले नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची रेफर कर दिया गया। रिम्स में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

रंजीत की मौत की खबर मिलते ही परिवार और गांव में मातम छा गया।

पोस्टमार्टम के बाद शव के साथ सड़क पर प्रदर्शन

शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद जब रंजीत का शव गांव पहुंचा तो ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। शाम करीब चार बजे बड़ी संख्या में ग्रामीण शव को लेकर मानकी ढीपा रिंग रोड पहुंचे और सड़क के बीचोंबीच शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

देखते ही देखते रिंग रोड पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। पुलिस और प्रशासन को सूचना मिलने के बाद टाटीसिलवे थाना की टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अडिग रहे।

ग्रामीणों ने रखीं ये प्रमुख मांगें

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • मृतक के परिवार को 30 लाख रुपये का मुआवजा
  • परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी
  • दुर्घटनास्थल पर अंडरपास का निर्माण
  • तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण के लिए स्पीड ब्रेकर बनाया जाए।
  • सड़क सुरक्षा के स्थायी उपाय किए जाएं।
  • एनएचएआई और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर आकर बातचीत करें।

ग्रामीणों का कहना था कि रंजीत अपने पीछे पत्नी और एक छोटे बेटे को छोड़ गए हैं। परिवार की आजीविका का मुख्य आधार वही थे, इसलिए सरकार को उनके परिवार की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

लगातार बारिश में भी डटे रहे लोग

शाम से रात तक रुक-रुक कर बारिश होती रही, लेकिन ग्रामीण सड़क से नहीं हटे। महिलाओं और युवाओं सहित बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे।

ग्रामीणों का कहना था कि रिंग रोड पर पहले भी कई सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया। उनका आरोप था कि तेज रफ्तार वाहनों की वजह से आए दिन लोगों की जान जा रही है।

चार घंटे से अधिक समय तक बाधित रहा यातायात

रिंग रोड जाम रहने के कारण दोनों दिशाओं में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। निजी वाहन, बसें, ट्रक और एंबुलेंस तक प्रभावित हुए।

कई यात्रियों को घंटों जाम में फंसना पड़ा। पुलिस ने कुछ वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से निकालने का प्रयास किया, लेकिन मुख्य मार्ग बंद रहने के कारण यातायात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका।

प्रशासन ने दी तत्काल सहायता

रात करीब साढ़े आठ बजे अंचल कार्यालय का एक कर्मचारी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचा।

प्रशासन की ओर से मृतक के अंतिम संस्कार के लिए 12 हजार रुपये की तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराई गई।

साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के मेंटेनेंस विभाग के प्रतिनिधि ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि उनकी सभी मांगों को सक्षम अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।

इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त कर सड़क से जाम हटा लिया।

दो दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो टोल प्लाजा जाम करने की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि दो दिनों के भीतर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे रिंग रोड के टोल प्लाजा को जाम कर बड़ा आंदोलन करेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। प्रशासन को सड़क सुरक्षा और पीड़ित परिवार की सहायता के लिए ठोस निर्णय लेना होगा।

सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस घटना के बाद एक बार फिर रांची रिंग रोड पर सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर अंडरपास, स्पीड ब्रेकर और पर्याप्त चेतावनी संकेत नहीं होने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि रिंग रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जाने चाहिए।

प्रशासन के सामने चुनौती

अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर मृतक के परिवार को राहत पहुंचाना और दूसरी ओर स्थानीय लोगों की सड़क सुरक्षा संबंधी मांगों का समाधान करना।

यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में इस तरह के आंदोलन और सड़क जाम की घटनाएं दोबारा सामने आ सकती हैं।

निष्कर्ष

रांची के मानकी ढीपा रिंग रोड पर हुए हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। रंजीत बैठा की मौत के बाद ग्रामीणों का साढ़े चार घंटे तक सड़क जाम करना इस बात का संकेत है कि स्थानीय लोग केवल मुआवजा ही नहीं, बल्कि स्थायी सुरक्षा व्यवस्था भी चाहते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की मांगों पर कितना तेजी से अमल करता है और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।