रांची: राज्य के आदिवासी समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के सहयोग से धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान संचालित किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं के लिए 90 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।
यह अभियान राज्य के सभी 24 जिलों में अगले पांच वर्षों तक संचालित होगा। योजना के तहत झारखंड के 223 प्रखंडों के 6,882 गांवों के पात्र लाभुकों का चयन किया जा रहा है। पूरे देश में इस योजना के लिए 375 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
पिछले वर्ष झारखंड को इस योजना के लिए 6 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, लेकिन राज्य में इसके सफल क्रियान्वयन और बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए इस वर्ष आवंटन बढ़ाकर 27 करोड़ रुपये कर दिया गया है। योजना में केंद्र और राज्य सरकार का योगदान क्रमशः 60 और 40 प्रतिशत रहेगा।
मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा
योजना के तहत अनुसूचित जनजाति के महिला एवं पुरुष मछली पालकों को समान रूप से 90 प्रतिशत अनुदान का लाभ दिया जाएगा। पहले प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में महिलाओं को अधिक और पुरुषों को अपेक्षाकृत कम अनुदान मिलता था, लेकिन अब इस नई व्यवस्था से दोनों वर्गों को समान लाभ मिलेगा।
केंद्र सरकार करती है लाभुकों का चयन
इस योजना के लिए लाभुकों का चयन केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है। चयनित लाभुकों की सूची मत्स्य विभाग को उपलब्ध कराई जाती है, जिसके बाद विभाग संबंधित योजनाओं का लाभ प्रदान करता है। पिछले वर्ष चयनित 195 लाभुकों के मुकाबले अब तक 237 योजनाओं का लाभ प्रदान किया जा चुका है।
इस वर्ष भी 11 प्रकार की योजनाओं के माध्यम से लाभुकों को सहायता दी जाएगी। इसके तहत अनुसूचित जनजाति के मछली पालक किसान अधिकतम 22.50 लाख रुपये तक की परियोजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
योजना का लाभ लेने के लिए लाभुकों को पहचान पत्र, जाति प्रमाण पत्र, भूमि से संबंधित दस्तावेज (या पट्टा) तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) प्रस्तुत करनी होगी। इच्छुक लाभुक अपने जिले के मत्स्य पदाधिकारी से संपर्क कर योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
योजना के तहत उपलब्ध 11 प्रमुख सुविधाएं
बायोफ्लॉक इकाई की स्थापना
आइस बॉक्स के साथ मोटरसाइकिल
आइस बॉक्स के साथ साइकिल
मछली बिक्री के लिए आइस बॉक्स युक्त तीन पहिया वाहन
मोती पालन की सुविधा
कार्प हैचरी निर्माण
नए रियरिंग (नर्सरी-बीज) तालाब का निर्माण
मिश्रित मत्स्य पालन
पंगेशियस एवं तिलापिया मछली पालन
बायोफ्लॉक तालाबों का निर्माण (चार लाख रुपये प्रति हेक्टेयर)
25 टैंक वाले मध्यम बायोफ्लॉक सिस्टम एवं छोटे आकार के आरएएस (रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम) की स्थापना
सरकार का मानना है कि इस योजना से आदिवासी समुदाय के लोगों को स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।