रांची : झारखंड की राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (होटवार जेल) में महिला कैदी के साथ कथित यौन शोषण मामले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के डीजीपी से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 8 जून को निर्धारित की गई है।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव की वेकेशन बेंच में इस संवेदनशील मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार से अब तक की जांच और कार्रवाई की जानकारी मांगी।
सरकार ने बनाई तीन सदस्यीय जांच कमेटी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह विभाग ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में निदेशक प्रशासन मनोज कुमार, सहायक कारा निरीक्षक तुषार रंजन गुप्ता और कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं निरीक्षणालय के प्रोवेशन पदाधिकारी चंद्रमोली सिंह को शामिल किया गया है।
सरकार ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि मामले की अलग-अलग स्तर पर जांच जारी है। जिला प्रशासन और जेल आईजी की ओर से भी स्वतंत्र जांच कराई जा रही है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
जुडिशियल इंक्वायरी भी जारी
मामले में डालसा (DLSA), रांची की जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर जुडिशियल इंक्वायरी भी शुरू कर दी गई है। बताया गया कि श्रुति सोरेन द्वारा न्यायिक जांच की जा रही है।
जांच के दौरान पीड़िता, जेल पीएलवी और जेल चिकित्सक के बयान दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
बाबूलाल मरांडी ने उठाया था मामला
इस मामले को सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए सार्वजनिक किया गया था। मामला सामने आने के बाद झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने तत्काल जांच टीम गठित की थी।
झालसा की टीम ने होटवार जेल पहुंचकर मामले की जांच की और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए। जांच रिपोर्ट बाद में झालसा को सौंप दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने वेकेशन कोर्ट में अर्जेंट मेंशनिंग को स्वीकार करते हुए सुनवाई शुरू की।
जेल प्रशासन पर उठ रहे सवाल
महिला कैदी के कथित यौन शोषण के आरोप सामने आने के बाद जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि जेल जैसी सुरक्षित जगह पर महिला कैदी सुरक्षित नहीं है, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
8 जून को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने डीजीपी को दो सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 जून को होगी। माना जा रहा है कि कोर्ट जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कड़ा रुख अपना सकता है।