रांची: झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम गुरुवार को रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से जमानत पर रिहा हो गए। उनकी रिहाई के बाद जेल के बाहर समर्थकों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और परिवार के सदस्यों की भारी भीड़ देखने को मिली। समर्थकों ने उनके स्वागत में नारेबाजी की और खुशी जाहिर की।
करीब दो साल बाद जेल से बाहर आए आलमगीर आलम को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जेल परिसर के बाहर जमा रहे। जेल प्रशासन ने सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उन्हें रिहा किया।
पीएमएलए कोर्ट से मिली नियमित जमानत
जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े मामले में विशेष पीएमएलए कोर्ट ने बेल बॉन्ड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आलमगीर आलम का रिलीज ऑर्डर जारी किया। अदालत में उनके अधिवक्ता ने 1-1 लाख रुपये के दो निजी मुचलके जमा किए, जिसके बाद अदालत ने उन्हें नियमित जमानत दे दी।
इस मामले में उनकी पत्नी और विधायक निसात आलम बेलर बनी हैं। सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका मंजूर होने के बाद स्थानीय अदालत में आवश्यक न्यायिक प्रक्रिया पूरी की गई।
जेल के बाहर जुटी समर्थकों की भीड़
आलमगीर आलम की रिहाई की खबर मिलते ही उनके समर्थक सुबह से ही बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा के बाहर जुटने लगे थे। जैसे ही वह जेल से बाहर आए, समर्थकों ने फूल-मालाओं और नारों के साथ उनका स्वागत किया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे “सच्चाई की जीत” बताते हुए खुशी जाहिर की। कई नेताओं ने कहा कि न्यायपालिका पर उन्हें भरोसा था और आखिरकार न्याय मिला।
पिछले साल ईडी ने किया था गिरफ्तार
बता दें कि ईडी ने आलमगीर आलम को 15 मई 2024 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले 6 मई 2024 को ईडी ने उनके ओएसडी संजीव लाल, नौकर जहांगीर आलम, ठेकेदार मुन्ना सिंह और कांट्रेक्टर राजीव सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की थी।
इस कार्रवाई में ईडी ने करोड़ों रुपये नकद बरामद किए थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के टेंडर में कमीशनखोरी का बड़ा खेल चल रहा था और कथित तौर पर यह रकम अधिकारियों और नेताओं तक पहुंचाई जाती थी।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
आलमगीर आलम की रिहाई के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस समर्थक इसे बड़ी राहत मान रहे हैं, वहीं विपक्ष इस मामले को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी रिहाई आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति पर असर डाल सकती है।