रांची: Ranchi में राज्य के लंबित बालू घाटों को लेकर खान विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के 16 जिलों में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद बंद पड़े 229 बालू घाटों को 10 जून से पहले हर हाल में शुरू करने का निर्देश खान सचिव Arwa Rajkamal ने अधिकारियों को दिया है।

लीज डीड लंबित होने से रुका संचालन

जानकारी के अनुसार, बालू घाटों का संचालन शुरू नहीं होने की मुख्य वजह लीज डीड की प्रक्रिया लंबित होना है। इनमें से करीब 35 बालू घाट सिर्फ उपायुक्त स्तर पर हस्ताक्षर नहीं होने के कारण अटके हुए हैं।

सोमवार को बालू घाट संचालन और अवैध खनन की समीक्षा को लेकर आयोजित टास्क फोर्स की ऑनलाइन बैठक में खान सचिव ने सभी जिलों के डीसी को 10 जून से पहले लंबित लीज डीड प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।

10 जून से लागू हो जाएगी NGT की रोक

खान सचिव ने बैठक में कहा कि 10 जून से बालू घाटों से बालू निकासी पर National Green Tribunal (NGT) की रोक प्रभावी हो जाती है। ऐसे में उससे पहले सभी लंबित घाटों की लीज प्रक्रिया पूरी कर संचालन शुरू करना बेहद जरूरी है।

उन्होंने बताया कि प्रक्रिया को तेज करने के लिए नया लीज डीड ड्राफ्ट भी जारी कर दिया गया है।

अवैध खनन पर होगी सख्त कार्रवाई

बैठक में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए। खान सचिव ने कहा कि आधुनिक तकनीक और विभिन्न विभागों के समन्वय से अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाएगी।

उन्होंने बताया कि सभी खनन पट्टों की डिजिटल फाइल तैयार की जा रही है, जिससे सैटेलाइट के जरिए निगरानी संभव हो सकेगी।

CCTV और ट्रैकिंग सिस्टम लगाने का आदेश

खान विभाग ने संवेदनशील मार्गों पर वाहन ट्रैकिंग सिस्टम लगाने, चेकपोस्ट निर्माण कराने और रेलवे साइडिंग समेत प्रवेश-निकासी बिंदुओं पर CCTV कैमरे लगाने का निर्देश दिया है।

इसके साथ ही “खनन प्रहरी” मोबाइल ऐप पर मिलने वाली शिकायतों की तत्काल जांच कर कार्रवाई करने को कहा गया है।

इन जिलों के घाटों की प्रक्रिया अंतिम चरण में

खान निदेशक Rahul Kumar Sinha ने बताया कि कई जिलों के बालू घाटों की कागजी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अगले 10 दिनों के भीतर उन्हें शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

इनमें बोकारो, दुमका, खूंटी, जामताड़ा, हजारीबाग, रांची, गोड्डा, पूर्वी सिंहभूम, रामगढ़ और लातेहार जिलों के कई बालू घाट शामिल हैं।

जल्द शुरू होगा बालू उठाव

विभाग का मानना है कि बालू घाट शुरू होने से निर्माण कार्यों में तेजी आएगी और अवैध बालू कारोबार पर भी रोक लगेगी। साथ ही सरकार को राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।