पटना: बिहार की राजनीति में आज बड़ा दिन माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का विस्तार आज होने जा रहा है। शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही नए मंत्रियों के नाम आधिकारिक रूप से सामने आएंगे। हालांकि, NDA के अंदर हुए मंथन और सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले की जानकारी विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से सामने आ चुकी है।
इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय और सामाजिक संतुलन को खास महत्व दिया गया है। एनडीए के सभी सहयोगी दलों ने अलग-अलग जातीय समूहों को साधने की रणनीति बनाई है, ताकि आगामी चुनावों में इसका राजनीतिक फायदा मिल सके।
JDU ने दलित, कुर्मी और अतिपिछड़ा वोट बैंक पर लगाया दांव
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाले गठबंधन में जनता दल यूनाइटेड ने सबसे ज्यादा सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। सूत्रों के मुताबिक JDU की ओर से कई प्रमुख जातीय समूहों को प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है।
JDU के संभावित मंत्री और जातीय समीकरण
- निशांत कुमार – कुर्मी
- अशोक चौधरी – दलित
- लेसी सिंह – राजपूत
- सुनील कुमार – दलित
- विजेंद्र यादव – यादव
- श्रवण कुमार – कुर्मी
- विजय चौधरी – भूमिहार
- मदन सहनी – मल्लाह
- जमा खान – मुस्लिम
- शीला मंडल – धानुक
- दामोदर रावत – धानुक
- बोलो मंडल – गंगोत
- रत्नेश सदा – दलित
JDU की सूची में दलित, कुर्मी, धानुक और पिछड़े वर्ग को विशेष तवज्जो दी गई है। इससे पार्टी ग्रामीण और सामाजिक आधार को मजबूत करने की तैयारी में दिख रही है।
BJP ने भी जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर बनाई सूची
भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने संभावित मंत्रियों की सूची में सामाजिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। पार्टी ने वैश्य, राजपूत, कुशवाहा, यादव और दलित समाज को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति बनाई है।
BJP के संभावित मंत्री
- विजय कुमार सिन्हा – भूमिहार
- दिलीप जायसवाल – वैश्य
- मंगल पांडे – ब्राह्मण
- सुरेंद्र मेहता – कुशवाहा
- संजय टाइगर – Rajput
- लखेंद्र पासवान – पासवान
- श्रेयसी सिंह – राजपूत
- अरुण शंकर प्रसाद – वैश्य
- राम कृपाल यादव – यादव
- रमा निषाद – मल्लाह
- नारायण शाह – वैश्य
- प्रमोद कुमार चंद्रवंशी – अतिपिछड़ा
बीजेपी इस सूची के जरिए पारंपरिक वोट बैंक के साथ-साथ पिछड़े और अतिपिछड़े वर्गों को भी साधने की कोशिश कर रही है।
सहयोगी दलों को भी मिला प्रतिनिधित्व
एनडीए के अन्य सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलने जा रही है। चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है।
सहयोगी दलों के संभावित मंत्री
लोजपा (रामविलास)
- संजय सिंह – राजपूत
- संजय पासवान – दलित
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा
राष्ट्रीय लोक मोर्चा
NDA का फोकस सोशल इंजीनियरिंग पर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में आगामी चुनावों को देखते हुए NDA ने पूरी रणनीति सामाजिक समीकरणों के आधार पर तैयार की है। दलित, पिछड़ा, अतिपिछड़ा, राजपूत, भूमिहार, मुस्लिम और यादव समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर गठबंधन ने हर वर्ग को साधने की कोशिश की है।
इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए NDA बिहार में अपने सामाजिक और राजनीतिक आधार को और मजबूत करने की तैयारी में है। अब सभी की नजर शपथ ग्रहण समारोह और अंतिम सूची पर टिकी हुई है।
क्या कहती है बिहार की राजनीति?
बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा से अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में NDA का यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस विस्तार से NDA आगामी चुनावों में मजबूत संदेश देने की कोशिश कर रही है कि गठबंधन हर वर्ग को साथ लेकर चलना चाहता है।