बिहार के भागलपुर से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां Vikramshila Setu का 133 नंबर पिलर रविवार देर रात ध्वस्त होकर गंगा नदी में समा गया। इस हादसे के बाद पुल पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है।
यह पुल बिहार की लाइफलाइन माना जाता है, ऐसे में इस घटना से पूरे इलाके में चिंता का माहौल बन गया है।
⏱️ आधे घंटे में ढहा पुल का हिस्सा
स्थानीय लोगों के अनुसार:
- रात 12:35 बजे पिलर धंसना शुरू हुआ
- करीब 1:00 बजे पुल का बड़ा हिस्सा गंगा में गिर गया
बताया जा रहा है कि करीब 33 मीटर लंबा हिस्सा नदी में समा गया। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
🚨 पुलिस और प्रशासन तुरंत हरकत में
पिलर में गड़बड़ी की सूचना मिलते ही सेतु पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत वरीय अधिकारियों को जानकारी दी।
मौके पर पहुंचे अधिकारियों में:
- जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी
- वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव
प्रशासन ने तत्काल पुल पर आवाजाही बंद कर दी और स्थिति का जायजा लिया।
👁️ प्रत्यक्षदर्शी ने बताया डरावना मंजर
प्रत्यक्षदर्शी गिरधारी कुमार ने बताया:
👉 “हम लोग अंतिम संस्कार के बाद गंगा स्नान करने पहुंचे थे। तभी देखा कि पहले छोटे-छोटे टुकड़े गिरे और फिर पूरा बड़ा हिस्सा नदी में समा गया। हम लोग डर कर वहां से भाग निकले।”
उन्होंने आशंका जताई कि हादसे के समय कोई वाहन भी पुल पर मौजूद हो सकता था, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
🏗️ कितना अहम है विक्रमशिला सेतु?
- कुल लंबाई: करीब 4.7 किलोमीटर
- उद्घाटन: वर्ष 2001
- उद्घाटन किया था Rabri Devi ने
- यह पुल भागलपुर को कोसी-सीमांचल समेत कई क्षेत्रों से जोड़ता है
इस सेतु के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।
⚠️ क्या है आगे की स्थिति?
प्रशासन ने फिलहाल पुल पर यातायात पूरी तरह बंद कर दिया है और तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है।
👉 आगे के कदम:
- नुकसान का आकलन
- संरचनात्मक जांच
- वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था
📢 निष्कर्ष
विक्रमशिला सेतु का पिलर गिरना बिहार के लिए एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर संकट बन सकता है। यह हादसा न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि पुलों के रखरखाव की जरूरत को भी उजागर करता है।