झारखंड के Hazaribagh जिले में भाई और दो बहनों की संदिग्ध मौत का मामला लगातार पेचीदा होता जा रहा है। इस सनसनीखेज घटना ने पूरे इलाके में दहशत और सवाल दोनों पैदा कर दिए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अब एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है, ताकि इस रहस्यमयी मौत की सच्चाई सामने लाई जा सके।
जंगल में मिले थे तीनों के शव
पुलिस के अनुसार, तीनों शव करीब चार दिन पहले वन क्षेत्र से बरामद किए गए थे। यह घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पौटा जंगल इलाके की है, जहां 27 अप्रैल को पुलिस ने भाई और दो बहनों के शव बरामद किए थे।
इस मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया क्योंकि तीनों एक ही परिवार से जुड़े थे और एक साथ उनकी मौत होना कई सवाल खड़े करता है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नहीं मिले चोट के निशान
हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक Aman Kumar ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी भी शव पर बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं।
👉 यह बात जांच को और उलझा रही है, क्योंकि:
- हत्या की आशंका भी बनी हुई है
- आत्महत्या की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता
अभी कुछ और मेडिकल और फॉरेंसिक जांच बाकी हैं, जिनसे मौत के असली कारण का पता चल सकेगा।
मृतकों की पहचान और पृष्ठभूमि
तीनों मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है:
- मोहम्मद आदिल (25) – निवासी कटकमदाग
- शानिया परवीन (19) – निवासी लोहसिंघा
- खुशी परवीन (21) – निवासी हजारीबाग मुफस्सिल
तीनों के शव एक ही स्थान से बरामद होने के कारण यह मामला और भी रहस्यमयी बन गया है।
23 अप्रैल से ही थे लापता
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, तीनों 23 अप्रैल से लापता थे। परिवार की ओर से उसी दिन गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
इसके बाद लगातार तलाश जारी रही, लेकिन चार दिन बाद जंगल में शव मिलने से मामला पूरी तरह से बदल गया।
SIT का गठन, जांच तेज
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी Aman Kumar ने एसडीपीओ (मुख्यालय) अमित कुमार आनंद के नेतृत्व में SIT का गठन किया है।
👉 SIT अब इन पहलुओं पर जांच कर रही है:
- मौत का असली कारण क्या है
- क्या यह सामूहिक आत्महत्या है या हत्या
- घटना में किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका
7-8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज
पुलिस ने मोहम्मद आदिल के पिता के बयान के आधार पर 7 से 8 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।
यह संकेत देता है कि परिवार को इस मामले में किसी साजिश या बाहरी हस्तक्षेप की आशंका है।
अब पुलिस इन आरोपियों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।
अल्पसंख्यक आयोग ने उठाए सवाल
इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी हलचल मचा दी है।
झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष Jyoti Singh Matharu ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि:
- 23 अप्रैल को शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई
- शुरुआती जांच संतोषजनक नहीं थी
मथारू ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर मामले में तेजी लाने और दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।
इलाके में डर और सवाल
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर एक साथ तीन लोगों की मौत कैसे हो गई और इसके पीछे असली वजह क्या है।
निष्कर्ष
हजारीबाग ट्रिपल डेथ केस अभी भी रहस्य बना हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोट के निशान नहीं मिलना और FIR में कई लोगों का नाम आना, दोनों ही जांच को जटिल बना रहे हैं।
अब सबकी नजर SIT की जांच पर टिकी है, जिससे उम्मीद है कि जल्द ही इस गुत्थी से पर्दा उठेगा।