मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने इजरायल के तेल अवीव समेत 100 से अधिक सैन्य और सुरक्षा ठिकानों पर बड़ा हमला किया है। यह हमला ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारीजानी की हत्या के बदले के रूप में किया गया बताया जा रहा है।
सरकारी ब्रॉडकास्टर प्रेस टीवी के अनुसार, यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत की गई है, जो अब तक अपने 61वें चरण में पहुंच चुका है।
💥 ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ क्या है?
IRGC के बयान के मुताबिक, यह ऑपरेशन ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाइयों का जवाब है।
इस ऑपरेशन की खास बातें:
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61वीं लहर में बड़े पैमाने पर हमला
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100+ ठिकानों को निशाना बनाया गया
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आधुनिक और घातक मिसाइलों का इस्तेमाल
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बदले की कार्रवाई के रूप में हमला
🚀 किन मिसाइलों का किया गया इस्तेमाल?
रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में ईरान ने अत्याधुनिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया:
इस्तेमाल किए गए हथियार:
इन हथियारों को खासतौर पर रणनीतिक और सैन्य ठिकानों को तबाह करने के लिए इस्तेमाल किया गया।
🌃 तेल अवीव में ‘ब्लैकआउट’ का दावा
IRGC ने दावा किया कि हमलों के बाद तेल अवीव में आंशिक ब्लैकआउट हो गया।
जमीनी हालात:
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कई इलाकों में बिजली बाधित
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सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित
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बचाव कार्यों में दिक्कत
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सैन्य नियंत्रण कमजोर पड़ा
प्रेस टीवी के मुताबिक, इस स्थिति ने जमीन पर मौजूद बलों के लिए हालात और चुनौतीपूर्ण बना दिए।
⚠️ 230 से अधिक हताहतों का दावा
IRGC का कहना है कि इस हमले में:
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230 से अधिक लोग हताहत हुए
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इसमें मृतक और घायल दोनों शामिल
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कई सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
🎯 किन-किन जगहों को बनाया गया निशाना?
तेल अवीव के अलावा कई अहम रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए गए:
प्रमुख टारगेट:
🌍 अमेरिकी ठिकाने भी निशाने पर?
रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष का असर सिर्फ इजरायल तक सीमित नहीं रहा।
इन देशों में भी असर:
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कतर
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बहरीन
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संयुक्त अरब अमीरात
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कुवैत
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सऊदी अरब
बताया जा रहा है कि यहां मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी जवाबी हमलों का सामना करना पड़ा।
🔥 क्यों बढ़ा तनाव?
यह पूरा घटनाक्रम ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का हिस्सा माना जा रहा है।
तनाव बढ़ने की वजह:
📊 क्या हो सकता है आगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला मध्य पूर्व में बड़े युद्ध की शुरुआत भी बन सकता है।
संभावित असर:
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क्षेत्रीय युद्ध का खतरा
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तेल कीमतों में उछाल
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वैश्विक बाजार पर असर
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सुरक्षा स्थिति और खराब