भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी के मजबूत रिश्ते हमेशा से रहे हैं। उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों जैसे सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बलरामपुर, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत में बड़ी संख्या में नेपाल से विवाह कर आई महिलाएं अपने पति के साथ भारत में रह रही हैं। लेकिन चुनाव के समय एक अहम सवाल उठता है—क्या ये महिलाएं भारत की मतदाता बन सकती हैं?
इस सवाल का सीधा जवाब है—नहीं, जब तक वे भारतीय नागरिकता प्राप्त नहीं कर लेतीं।
🇮🇳 वैध निवासी हैं, लेकिन नागरिक नहीं
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, नेपाल से आई महिलाएं जो भारतीय नागरिकों से विवाह कर यहां स्थायी रूप से रह रही हैं, वे भारत की वैध निवासी तो मानी जाती हैं, लेकिन भारतीय नागरिक नहीं। इसी वजह से उन्हें मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने और वोट देने का अधिकार नहीं मिलता।
भारत-नेपाल संधि के तहत नेपाली नागरिकों को भारत में रहने-काम करने की छूट है, लेकिन मतदान का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को ही प्राप्त है।
📜 नेपाली महिलाओं को नागरिकता कैसे मिल सकती है?
विवाह के बाद नेपाली महिलाओं को भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करना होता है। इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी अनिवार्य हैं—
नागरिकता के लिए आवश्यक शर्तें
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भारत में लगातार 7 साल निवास का प्रमाण
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विवाह का वैध पंजीकरण (Marriage Certificate)
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आवासीय दस्तावेज (राशन कार्ड, बिजली बिल, मकान प्रमाण आदि)
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आवेदन की प्रक्रिया जिलाधिकारी, राज्य और केंद्र के गृह विभाग के माध्यम से
इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही किसी नेपाली महिला को भारतीय नागरिकता मिल सकती है, और तभी वह मतदाता सूची में नाम जुड़वा सकती है।
🧒 बच्चों को मिल सकता है मतदान का अधिकार
हालांकि, चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, अगर नेपाली महिला और भारतीय नागरिक के बीच जन्मे बच्चे तय मानकों को पूरा करते हैं, तो उन्हें भारतीय नागरिक माना जाएगा। ऐसे बच्चों का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जा सकता है।
🗳️ भारत में जन्म लेने वालों के लिए नागरिकता के नियम
भारतीय नागरिकता जन्म के आधार पर तीन अलग-अलग समय सीमाओं में तय की जाती है—
📌 1 जुलाई 1987 से पहले जन्म
📌 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्म
📌 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्म
भारत-नेपाल संधि के चलते नेपाली नागरिक भारत में वैध निवासी माने जाते हैं, लेकिन मतदाता बनने के लिए नागरिकता अनिवार्य है।
🔍 क्यों जरूरी है यह नियम?
चुनाव आयोग का कहना है कि मतदान देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और यह अधिकार केवल उसी व्यक्ति को दिया जा सकता है, जो भारत का नागरिक हो। वैध निवास और नागरिकता—दोनों में स्पष्ट अंतर है।
📌 निष्कर्ष
नेपाल से विवाह कर भारत आई महिलाएं सामाजिक और पारिवारिक रूप से भले ही भारतीय जीवन का हिस्सा बन चुकी हों, लेकिन कानून के अनुसार मतदान का अधिकार नागरिकता मिलने के बाद ही संभव है। वहीं, उनके बच्चे निर्धारित नियमों के तहत भारत के मतदाता बन सकते हैं।