पटना। बिहार में जमीन से जुड़े कामकाज एक बार फिर ठप होने के आसार हैं। बिहार राजस्व सेवा के अधिकारी सोमवार से सामूहिक अवकाश पर जाने का ऐलान कर चुके हैं। राजस्व सेवा संघ ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर यह फैसला लिया है, जिसकी लिखित सूचना पहले ही विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल को दे दी गई है।
संघ का दावा है कि राजस्व सेवा अधिकारियों के समर्थन में बड़ी संख्या में राजस्व कर्मचारी भी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। ऐसे में दाखिल-खारिज, परिमार्जन, जमाबंदी सुधार, भूमि म्यूटेशन समेत कई अहम कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
अधिकारियों की अनदेखी का आरोप
राजस्व सेवा संघ की ओर से प्रधान सचिव को सौंपे गए पत्र में संवर्ग के अधिकारियों की लगातार अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया गया है। संघ का कहना है कि जिन पदों को पूर्व में बिहार राजस्व सेवा के लिए स्वीकृत किया गया था, उन पर बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) के अधिकारियों की तैनाती की जा रही है।
संघ ने यह भी आरोप लगाया है कि अंचलाधिकारी के बाद के महत्वपूर्ण पद डीसीएलआर (डिप्टी कलेक्टर लैंड रिफॉर्म्स) पर भी बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों को नियुक्त नहीं किया जा रहा है।
हाई कोर्ट के आदेश की अनदेखी
राजस्व सेवा संघ का कहना है कि इस मामले में पटना हाई कोर्ट के आदेश को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। हाई कोर्ट ने जून 2024 में डीसीएलआर पद पर बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों की तैनाती का स्पष्ट आदेश दिया था, लेकिन अब तक उसे लागू नहीं किया गया।
यह मामला फिलहाल पटना हाई कोर्ट में विचाराधीन है, इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
नए पद सृजन पर भी नाराज़गी
इस बीच राज्य सरकार द्वारा राजस्व सेवा अधिकारियों के लिए अनुमंडल राजस्व अधिकारी का नया पद सृजित किया गया है। संघ का कहना है कि यह पद सृजन स्वीकार्य नहीं है और इससे उनकी मूल मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
आम जनता पर पड़ेगा असर
यदि यह सामूहिक अवकाश लंबे समय तक चलता है, तो इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा। जमीन खरीद-बिक्री, नामांतरण, प्रमाण पत्र और अन्य राजस्व से जुड़े कार्यों में भारी देरी हो सकती है।
अब सभी की नजरें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वह राजस्व सेवा संघ की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और यह हड़ताल कब तक जारी रहती है।