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23 दिन बाद भी लापता 14 साल की मुन्नी कुमारी, पुलिस की नाकामी पर उठ रहे गंभीर सवाल

चतरा के गिद्धौर थाना क्षेत्र से लापता 14 वर्षीय मुन्नी कुमारी का 23 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं। पुलिस की कार्यशैली पर सवाल, एसपी की सख्ती के बाद शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन।

चतरा जिले के गिद्धौर थाना क्षेत्र से लापता 14 वर्षीय मुन्नी कुमारी को गायब हुए पूरे 23 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा है। इस मामले में सबसे ज्यादा सवाल अगर किसी पर उठ रहे हैं, तो वह है गिद्धौर थाना पुलिस की कार्यशैली, जिसे स्थानीय लोग अब खुलकर शर्मनाक नाकामी बता रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि पुलिस खुद यह आशंका जता चुकी है कि मुन्नी कुमारी की बॉडी किसी ट्रेंच (खाई) में हो सकती है, इसके बावजूद शुरुआती 20 से अधिक दिनों तक कोई सघन तलाशी अभियान नहीं चलाया गया


❓ जब आशंका थी, तो 23 दिन तक खामोशी क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि
👉 अगर पुलिस को पहले से अंदेशा था कि बच्ची के साथ कोई अनहोनी हो चुकी है,
👉 अगर बॉडी ट्रेंच में होने की आशंका थी,

तो फिर 23 दिनों तक गिद्धौर थाना पुलिस आखिर खामोश क्यों रही?

न तो जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया,
न ड्रोन या डॉग स्क्वॉड की मदद ली गई,
और न ही कोई ठोस रणनीति नजर आई।


😢 परिजन रोते रहे, पुलिस देती रही रटा-रटाया जवाब

मुन्नी कुमारी के माता-पिता लगातार थाने के चक्कर काटते रहे
रोते-बिलखते परिजन इंसाफ की गुहार लगाते रहे, लेकिन उन्हें हर बार सिर्फ यही जवाब मिला—
“जांच जारी है।”

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की जांच
➡️ कागजों और बयानों से आगे नहीं बढ़ सकी,
➡️ जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई।


🚨 एसपी की सख्ती के बाद आई हरकत

मामले में तब जाकर हलचल तेज हुई, जब
चतरा के पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार अग्रवाल
और सिमरिया एसडीपीओ शुभम खंडेलवाल ने सख्त रुख अपनाया।

इसके बाद ही:

  • 🌳 जंगलों में सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ

  • 🏘️ गांव-गांव तलाशी अभियान चलाया जा रहा है

  • 👮‍♂️ एसडीपीओ खुद इलाके का निरीक्षण कर रहे हैं

हालांकि सवाल अब भी कायम है कि
यह सक्रियता 23 दिन पहले क्यों नहीं दिखाई गई?


⚖️ जवाबदेही और पुलिस सिस्टम पर सवाल

यह मामला सिर्फ एक गुमशुदगी नहीं रहा, बल्कि अब यह
👉 पुलिस की जवाबदेही,
👉 कार्यसंस्कृति,
👉 और संवेदनहीन सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मुन्नी कुमारी एक गरीब परिवार की बेटी है
अगर यही मामला किसी प्रभावशाली या संपन्न परिवार से जुड़ा होता,
तो शायद पुलिस की सक्रियता पहले दिन से ही नजर आती।


🛑 गुमशुदगी नहीं, सिस्टम की बेरुखी का प्रतीक

23 दिन बीत जाने के बाद भी जब एक नाबालिग बच्ची का कोई सुराग नहीं मिलता,
तो यह सिर्फ पुलिस की नाकामी नहीं, बल्कि
पूरे सिस्टम की असंवेदनशीलता को उजागर करता है।

अब सवाल यह है—
❓ क्या मुन्नी कुमारी को इंसाफ मिलेगा?
❓ क्या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?


📢 Samachar Plus की मांग

इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और
जिन अधिकारियों की लापरवाही से 23 दिन बर्बाद हुए,
उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

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