झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक (ऑपरेशन) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह चाईबासा पहुंचे, जहां उन्होंने सारंडा क्षेत्र में चल रहे ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ को लेकर सुरक्षा बलों के वरीय अधिकारियों के साथ अहम समीक्षा बैठक की।

सारंडा में माओवादियों के गढ़ पर निर्णायक वार की तैयारी

कोल्हान प्रमंडल के घने जंगलों वाला सारंडा क्षेत्र लंबे समय से माओवादियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, कुख्यात माओवादी नेता मिसिर बेसरा समेत कई बड़े नक्सली नेता इसी इलाके में अपनी पनाहगाह बनाए हुए हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा बलों द्वारा विशाल और समन्वित ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

DG ऑपरेशन ने दिए सख्त निर्देश

CRPF DG (ऑपरेशन) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने बैठक के दौरान:

  • नक्सल विरोधी अभियानों को और तेज करने

  • इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने

  • जंगल क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन की प्रभावशीलता बढ़ाने

  • स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच बेहतर समन्वय

जैसे अहम बिंदुओं पर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए।

2026 तक माओवाद मुक्त भारत का लक्ष्य

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि मार्च 2026 तक पूरे देश से माओवादियों का खात्मा कर दिया जाएगा। इसी लक्ष्य के तहत:

  • झारखंड

  • छत्तीसगढ़

  • आंध्र प्रदेश

  • महाराष्ट्र

  • बिहार

  • ओडिशा

सहित सभी नक्सल प्रभावित राज्यों में एक साथ सघन और निर्णायक अभियान चलाया जा रहा है।

झारखंड में बढ़ेगी कार्रवाई की रफ्तार

DG ऑपरेशन के चाईबासा दौरे से साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में नक्सलियों पर बड़ा प्रहार किया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियां इसे झारखंड में माओवादी नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में निर्णायक मोड़ मान रही हैं।


🔹 निष्कर्ष

सारंडा जैसे दुर्गम इलाकों में ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट के तहत सुरक्षा बलों की सक्रियता यह दर्शाती है कि केंद्र और राज्य सरकार नक्सलवाद के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। आने वाले समय में झारखंड से माओवाद के खात्मे की दिशा में बड़े परिणाम देखने को मिल सकते हैं।