रांची: क्यूरेस्टा हॉस्पिटल, रांची ने उन्नत चिकित्सा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है। अस्पताल की विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने एक ट्रॉमा मरीज पर दुर्लभ और जटिल लैप्रोस्कोपिक स्प्लेनक्टॉमी (तिल्ली हटाने की सर्जरी) को सफलतापूर्वक अंजाम देकर क्षेत्र में चिकित्सा का नया मानक स्थापित किया है। यह सर्जरी मिनिमली इनवेसिव तकनीक से की गई चुनिंदा मामलों में से एक मानी जा रही है।
🩺 कैसे पहुंचा मरीज अस्पताल?
अस्पताल में लाए गए 42 वर्षीय मरीज को सांड की जोरदार टक्कर से गंभीर पेट की चोट (ब्लंट एब्डोमिनल ट्रॉमा) लगी थी। इस हादसे में उसकी तिल्ली फट गई, जिससे अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव हुआ और मरीज शॉक की स्थिति में पहुंच गया। डॉक्टरों के अनुसार मरीज अपने शरीर का लगभग 50 प्रतिशत खून खो चुका था, जिससे उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी।
⚕️ जटिल सर्जरी, लेकिन आधुनिक तकनीक का कमाल
आमतौर पर ऐसे मामलों में ओपन स्प्लेनक्टॉमी की जाती है, जिसमें पेट पर लंबा चीरा लगाना पड़ता है। इससे—
जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
लेकिन क्यूरेस्टा हॉस्पिटल की विशेषज्ञ टीम ने मरीज की स्थिति का गहन मूल्यांकन कर लैप्रोस्कोपिक स्प्लेनक्टॉमी का साहसिक निर्णय लिया।
👨⚕️ किन डॉक्टरों ने निभाई अहम भूमिका?
इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व किया—
-
डॉ. मेजर रमेश दास – निदेशक एवं प्रमुख, मिनिमली इनवेसिव सर्जरी
-
डॉ. ओम प्रकाश – जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन
-
डॉ. आभास – एनेस्थीसिया विशेषज्ञ
टीम ने महज 5–10 मिमी के तीन छोटे चीरे लगाकर आधुनिक कैमरा और विशेष उपकरणों की मदद से तिल्ली की रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित रूप से नियंत्रित किया और तिल्ली को सफलतापूर्वक निकाल लिया।
🚑 सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति
सर्जरी के बाद मरीज की हालत तेजी से सुधर रही है। डॉक्टरों के अनुसार—
-
मरीज को 2–3 दिनों में छुट्टी दी जा सकती है
-
दर्द और संक्रमण का खतरा बेहद कम
-
मरीज जल्द सामान्य जीवन में लौट सकेगा
🗣️ डॉक्टर ने क्या कहा?
डॉ. मेजर रमेश दास ने कहा—
“ट्रॉमा मरीज में लैप्रोस्कोपिक स्प्लेनक्टॉमी रांची में बहुत कम होती है। हम इस तरह की आपातकालीन स्थिति में इस सर्जरी को सफलतापूर्वक करने वाली शुरुआती टीमों में शामिल हैं।”
उन्होंने बताया कि ओपन सर्जरी में जहां मरीज को 5–7 दिन अस्पताल में रहना पड़ता है, वहीं इस तकनीक से यह अवधि आधी से भी कम हो जाती है।
💉 तिल्ली हटने के बाद क्या सावधानियां?
संभावित संक्रमण से बचाव के लिए मरीज को—
-
न्यूमोकोकल वैक्सीन
-
मेनिन्जोकोकल वैक्सीन
-
इन्फ्लुएंजा वैक्सीन
-
समय-समय पर बूस्टर डोज
दिए जाएंगे।
💰 फीस में भी मरीज को राहत
क्यूरेस्टा हॉस्पिटल ने इस जटिल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया।
सर्जरी शुल्क ओपन स्प्लेनक्टॉमी के बराबर रखा गया, जबकि कम दिन अस्पताल में रहने से मरीज का कुल खर्च भी कम हुआ।
🏥 एडवांस ट्रॉमा केयर में क्यूरेस्टा की पहचान
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, यह केस हाल ही में बिना छाती खोले फेफड़े से गोली निकालने की VATS सर्जरी के बाद एक और बड़ी उपलब्धि है। यह साबित करता है कि क्यूरेस्टा हॉस्पिटल रांची ट्रॉमा केयर और एडवांस मिनिमली इनवेसिव सर्जरी में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।