झारखंड राज्य में लंबे समय से लंबित पेसा (Panchayats Extension to Scheduled Areas Act – PESA) नियमावली को आखिरकार अधिसूचित कर दिया गया है। पंचायती राज विभाग ने 2 जनवरी 2026 को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की, जिस पर विभागीय सचिव के हस्ताक्षर हैं।
यह फैसला अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के लिए नए साल का सबसे बड़ा तोहफा माना जा रहा है, क्योंकि इससे ग्राम सभाओं को अब भूमि, जल, जंगल और खनिज संसाधनों पर निर्णायक अधिकार मिलेंगे।
🟢 क्या है पेसा अधिनियम? (PESA Act Background)
पेसा अधिनियम को 1996 में केंद्र सरकार ने पारित किया था। इसका उद्देश्य पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाना है।
पेसा अधिनियम के प्रमुख उद्देश्य:
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ग्राम सभा को सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था बनाना
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भूमि अधिग्रहण में ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य
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खनिज व वन संसाधनों का स्थानीय नियंत्रण
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आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा
झारखंड के गठन (2000) के बाद से ही आदिवासी संगठनों द्वारा पेसा नियमावली लागू करने की लगातार मांग की जा रही थी।
🟡 कब और कैसे मिली मंजूरी?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे “आदिवासियों के अधिकारों को लौटाने वाला ऐतिहासिक फैसला” बताते हुए कहा कि ग्राम सभाएं अब अपनी जमीन और संसाधनों की खुद रक्षा कर सकेंगी।
📍 किन जिलों में लागू होगी पेसा नियमावली?
यह नियमावली झारखंड के 15 अनुसूचित जिलों में लागू होगी, जहां आदिवासी आबादी बहुल है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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रांची
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खूंटी
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गुमला
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सिमडेगा
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चाईबासा
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सरायकेला-खरसावां
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लातेहार
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लोहरदगा
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पलामू (आंशिक)
📄 अधिसूचना की मुख्य विशेषताएं (Key Highlights)
करीब 20 पन्नों की अधिसूचना में 17 अध्याय शामिल हैं। इसके अहम प्रावधान इस प्रकार हैं:
🔹 1. ग्राम सभा को विशेष अधिकार
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खनन, जल उपयोग और वन उत्पादों पर निर्णय
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भूमि अधिग्रहण के लिए ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति
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निजी व सरकारी परियोजनाओं पर रोक लगाने का अधिकार
🔹 2. स्थानीय विकास पर नियंत्रण
🔹 3. आवेदन और प्रक्रिया सरल
🔹 4. संस्कृति और परंपरा का संरक्षण
⚖️ न्यायालय से भी जुड़ा है मामला
यह अधिसूचना झारखंड हाईकोर्ट में चल रहे पेसा से जुड़े मामले के संदर्भ में भी अहम है।
👉 अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को होनी है, जहां इस नियमावली की संवैधानिक वैधता पर भी चर्चा संभव है।
🗣️ राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
✅ समर्थन में
❌ विरोध में
⚖️ पेसा नियमावली: गुण और दोष (Merits & Demerits)
✔️ गुण (Merits)
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सशक्तिकरण: ग्राम सभा को असली ताकत
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भागीदारी आधारित विकास: योजनाएं जमीनी होंगी
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संस्कृति संरक्षण: आदिवासी पहचान मजबूत
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कानूनी स्पष्टता: वर्षों पुरानी मांग पूरी
❌ दोष (Demerits)
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कुछ प्रावधानों को डायल्यूट किए जाने का आरोप
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ग्राम सभाओं में जागरूकता की कमी
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राजनीतिक विवाद और कानूनी चुनौतियां
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केवल अनुसूचित क्षेत्रों तक सीमित प्रभाव
🧾 निष्कर्ष
झारखंड में पेसा नियमावली की अधिसूचना आदिवासी अधिकारों के इतिहास में एक मील का पत्थर है। यदि इसका ईमानदारी से क्रियान्वयन किया गया, तो यह न सिर्फ भूमि और संसाधनों की रक्षा करेगा बल्कि आदिवासी समाज को वास्तविक स्वशासन की ताकत भी देगा।
अब सबसे बड़ी चुनौती है— जागरूकता, प्रशिक्षण और पारदर्शी अमल।