चतरा: झारखंड के चतरा जिले के कुंदा थाना क्षेत्र के सुदूरवर्ती गेंदरा गांव में रविवार देर रात हुई गोलाबारी की घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। इस फायरिंग में टीएसपीसी के दो पूर्व नक्सली—दिवेंद्र गंझु और चुरामन गंझु—की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वहीं राजद नेता श्याम भोक्ता उर्फ डीसी और उनके साले गोपाल गंझु गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। दोनों को बेहतर इलाज के लिए रिम्स, रांची रेफर किया गया है।
कैसे हुई घटना?
सूत्रों के अनुसार देर रात करीब आधा दर्जन हथियारबंद लोग राजद नेता श्याम भोक्ता के घर पहुंचे और अचानक फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान घरवालों और ग्रामीणों ने भी मुकाबला किया। दोनों पक्षों के बीच जमकर झड़प और गोलीबारी हुई, जिसमें दो हमलावर ढेर हो गए, जबकि श्याम भोक्ता और उनके साले गंभीर रूप से घायल हो गए।
बताया जा रहा है कि—
श्याम भोक्ता को गर्दन में गोली लगी
गोपाल गंझु के सिर में गोली लगी
दोनों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
पुलिस ने गांव को घेराबंदी कर बनाया पुलिस छावनी
घटना की खबर मिलते ही पुलिस महकमा अलर्ट हो गया।
कुंदा थाना प्रभारी, लावालौंग थाना प्रभारी, सिमरिया पुलिस निरीक्षक और एसएसबी 35 बटालियन के जवान मौके पर पहुंचे। पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
एसपी सुमित कुमार अग्रवाल और एसडीपीओ शुभम खंडेलवाल भी जांच के लिए रवाना हो गए। फिलहाल पुलिस अधिकारी आधिकारिक बयान देने से बच रहे हैं और वरीय अधिकारियों के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं।
नक्सल कनेक्शन और पुरानी रंजिश का संदिग्ध एंगल
घटना को लेकर कई बड़ी बातें सामने आई हैं—
मृतक दिवेंद्र गंझु टीएसपीसी का पूर्व नक्सली सदस्य था
उसके खिलाफ 36 आपराधिक मामले दर्ज बताए जा रहे हैं
घायल श्याम भोक्ता भी टीएसपीसी से जुड़ा रह चुका है
श्याम भोक्ता एनआईए का अभियुक्त भी है
पुलिस का मानना है कि यह मामला नक्सली बदले की कार्रवाई और पुरानी रंजिश से जुड़ा हो सकता है। हालांकि गैंगवार की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा।
गांव में दहशत, लोग घरों में कैद
गोलियों की आवाज़ से पूरा इलाका दहशत में है। ग्रामीण डर के कारण घरों से बाहर नहीं निकल रहे। पुलिस लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है।
क्या यह नक्सली हमला था या गैंगवार?
फिलहाल पुलिस तीन एंगल से जांच कर रही है—
✔ पुरानी रंजिश
✔ नक्सली प्रतिशोध
✔ आपसी गैंगवार
पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले हथियार और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद तस्वीर साफ होगी।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि चतरा और आसपास के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपराध और पुराने नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं। पुलिस जांच के बाद ही इस पूरे मामले से पर्दा उठ पाएगा।