Accident Control Technology: सर्दी के मौसम में घना कोहरा सड़क सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। खासतौर पर एक्सप्रेस-वे पर तेज रफ्तार वाहनों के कारण विजिबिलिटी कम होते ही हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसी के चलते सिर्फ दिसंबर के महीने में ही बहुत से लोगों ने एक्सप्रेस वे पर हुए सड़क हादसों में जान गंवाई है।
इन हादसों के पीछे की सबसे बड़ी वजह हैं कोहरे में सामने चल रहे वाहन की दूरी का अंदाजा न लग पाना, अचानक ब्रेक लगना, लेन बदलते समय गलती करना.....। विदेश में भी कोहरा पड़ता है, लेकिन वहां इसते सड़क हादसे नहीं होते, क्योंकि वहां कई आधुनिक टेक्नोलॉजी की मदद से हादसों को काफी हद तक रोका जाता है।
दुनिया भर की जगहों पर कोहरे केे दौरान होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए इन टेक्नोलॉजी की जानकारी लगातार दी जा रही हैं। आइए जानते हैं ऐसी 4 जरूरी टेक्नोलॉजी के बारे में, जो कोहरे के मौसम में एक्सप्रेस-वे पर जान बचाने में बेहद कारगर साबित हो सकती हैं।
इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS)
इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम कोहरे के दौरान सड़क हादसों को रोकने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। ये सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हाई-रेजोल्यूशन CCTV कैमरे और एडवांस सेंसर की मदद से एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक की रियल-टाइम निगरानी करता है। कोहरे में जब विजिबिलिटी बेहद कम हो जाती है, तब ये सिस्टम वाहनों की स्पीड, लेन डिसिप्लिन और ट्रैफिक डेंसिटी पर लगातार नजर रखता है। किसी भी असामान्य स्थिति जैसे अचानक ट्रैफिक जाम, गलत लेन ड्राइविंग या एक्सीडेंट की आशंका दिखते ही कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है। इसके बाद मौके पर पेट्रोलिंग टीम, एंबुलेंस या ट्रैफिक पुलिस को तुरंत रवाना किया जा सकता है, जिससे बड़े हादसे टाले जा सकते हैं।
फॉग डिटेक्शन और स्मार्ट अलर्ट सिस्टम
फॉग डिटेक्शन सिस्टम खास तौर पर सर्दियों में होने वाले कोहरे को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। ये सेंसर आधारित तकनीक हवा में मौजूद नमी और विजिबिलिटी लेवल को मापकर कोहरे की घनता का आकलन करती है। जैसे ही कोहरा बढ़ता है, सिस्टम अपने-आप डिजिटल साइन बोर्ड पर स्पीड लिमिट कम करने और सावधानी बरतने के मैसेज दिखाने लगता है। कई आधुनिक एक्सप्रेस-वे पर ये अलर्ट सीधे ड्राइवर के मोबाइल फोन या वाहन के डैशबोर्ड सिस्टम तक भी भेजा जाता है। इससे ड्राइवर समय रहते अपनी रफ्तार कम कर लेते हैं और अचानक ब्रेक या टक्कर की संभावना काफी हद तक घट जाती है।
ऑटोमैटिक स्पीड कंट्रोल और ई-चालान सिस्टम
कोहरे में सबसे बड़ा खतरा ओवरस्पीडिंग से होता है। ऑटोमैटिक स्पीड कंट्रोल सिस्टम रडार और हाई-स्पीड कैमरों की मदद से हर वाहन की गति पर नजर रखता है। तय सीमा से ज्यादा रफ्तार होने पर सिस्टम तुरंत वाहन की पहचान कर लेता है और ई-चालान जनरेट कर देता है। ई-चालान की सख्ती का मनोवैज्ञानिक असर ड्राइवरों पर पड़ता है, जिससे वे कोहरे में भी नियमों का पालन करते हैं। इससे न सिर्फ टक्कर की आशंका कम होती है, बल्कि एक्सप्रेस-वे पर ट्रैफिक का फ्लो भी सुरक्षित और नियंत्रित बना रहता है।
लेन गाइडेंस टेक्नोलॉजी
कोहरे में लेन दिखाई न देना कई बड़े हादसों की वजह बनता है। लेन बदलते समय अक्सर बड़े हादसे होते हैं। ऐसे में LED आधारित रिफ्लेक्टिव रोड स्टड्स इस समस्या का प्रभावी समाधान हैं। ये स्टड्स सड़क की लेन और किनारों पर लगाए जाते हैं, जो कम विजिबिलिटी में भी तेज रोशनी के साथ चमकते हैं। इससे ड्राइवर को सड़क की दिशा, लेन की चौड़ाई और आगे चल रहे वाहन की दूरी का बेहतर अंदाजा मिलता है। कुछ एडवांस स्टड्स मौसम के अनुसार रंग बदलते हैं, जिससे ड्राइवर को तुरंत सतर्क होने का संकेत मिल जाता है।