रांची: सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के मुड़ला पहाड़ पर छह साल पहले मिले अमित कुमार श्रीवास्तव के अधजले शव के मामले में अदालत ने तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। अपर न्याययुक्त अमित शेखर की अदालत ने रोहित खलखो, गणेश खलखो और इंदवा तिर्की को राहत दी। अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल नहीं रहा। वहीं, मामले के एक अन्य आरोपी सुभाष सेठ के अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण उसका मामला अलग कर दिया गया है।
कोर्ट में पेश नहीं हुआ आरोपी, अर्जी खारिज
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी सुभाष सेठ सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज किए जाने की तिथि पर अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। उसकी ओर से दायर रिप्रेजेंटेशन अर्जी को अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद सुभाष सेठ का मामला अन्य आरोपियों से अलग कर दिया गया।
इसे भी पढ़ें: अनिल शर्मा से फहीम खान तक… झारखंड के 53 कैदियों की रिहाई पर सरकार ने लगाया ब्रेक
16 अक्टूबर से लापता था अमित
रातू के चटकपुर निवासी अशोक कुमार श्रीवास्तव का पुत्र अमित कुमार श्रीवास्तव चालक का काम करता था। वह सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के लक्ष्मीनगर में अपने मामा के घर पर रहता था। 16 अक्टूबर 2019 से अमित लापता था। उसके पिता अशोक कुमार श्रीवास्तव के बयान पर सुखदेवनगर थाना में सनहा दर्ज कराया गया था। इसके दो दिन बाद, 18 अक्टूबर 2019 को मुड़ला पहाड़ पर अमित का अधजला शव मिला। इसके बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई।
दोस्तों को गोली मारने की धमकी देने से शुरू हुआ था विवाद
पुलिस के खुलासे के मुताबिक, अमित की दोस्ती गणेश खलखो, इंदवा तिर्की, रोहित तिर्की उर्फ रोहित कच्छप, सुभाष सेठ और रवि गोप उर्फ बड़कू से थी। पुलिसिया आरोप के अनुसार, 16 अक्टूबर 2019 की दोपहर अमित अपने पांच दोस्तों के साथ हेहल में एक जगह बैठकर खा-पी रहा था। इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि नशे की हालत में अमित ने गणेश खलखो और रोहित तिर्की को गोली मारकर हत्या करने की धमकी दी। इस दौरान उनके बीच मारपीट भी हुई। बाद में अन्य दोस्तों ने बीच-बचाव किया और अमित ने माफी मांग ली।
इसे भी पढ़ें: चाईबासा में भीषण सड़क हादसा! ट्रेलर से टकराई कार, एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत, 2 की हालत गंभीर
मुड़ला पहाड़ पर हत्या करने का था आरोप
पुलिस के अनुसार, विवाद शांत होने के बाद सभी ने दोबारा शराब पी और घूमने के लिए मुड़ला पहाड़ चले गए। उस समय अंधेरा हो चुका था। पुलिसिया आरोप था कि धमकी से नाराज गणेश और रोहित ने अमित के साथ मारपीट की और बाद में पत्थर से कूचकर उसकी हत्या कर दी। शव की पहचान मिटाने के उद्देश्य से उसे जलाने का भी आरोप लगाया गया था।
हालांकि, अदालत में अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत कर आरोप साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर रोहित खलखो, गणेश खलखो और इंदवा तिर्की को बरी कर दिया गया।