रांची: झारखंड के गुमला जिले से इलाज के लिए रांची पहुंचे संजय गुप्ता लंबे समय से ब्लड प्रेशर के उतार-चढ़ाव की समस्या से परेशान थे। कई प्रयासों के बावजूद उनकी समस्या की सही वजह सामने नहीं आ पा रही थी। इसके बाद उन्हें रांची के इरबा स्थित Curesta ACMS Super Speciality Hospital लाया गया। यहां जांच के दौरान MRI स्कैन में एक बेहद जटिल और दुर्लभ स्थिति का पता चला। मरीज की Adrenal Gland में करीब 8×10 सेंटीमीटर का बड़ा ट्यूमर पाया गया, जिसकी स्थिति किडनी, लिवर और IVC यानी Inferior Vena Cava के बेहद करीब थी।
इतने बड़े और महत्वपूर्ण अंगों के आसपास स्थित ट्यूमर को निकालना सर्जरी के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि, Curesta ACMS Super Speciality Hospital की टीम ने इस जटिल केस में ओपन सर्जरी के बजाय लैप्रोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालने में कामयाबी हासिल की।
लंबे समय से ब्लड प्रेशर में हो रहा था उतार-चढ़ाव
मरीज संजय गुप्ता के मामले में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि लंबे समय से ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव की समस्या के बावजूद बीमारी की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो पा रही थी। ऐसी स्थिति में केवल सामान्य लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान करना मुश्किल हो सकता है।
मरीज को आगे की जांच और उपचार के लिए Curesta ACMS Super Speciality Hospital, Irba, Ranchi लाया गया। यहां MRI स्कैन कराया गया। जांच रिपोर्ट में Adrenal Gland के पास लगभग 8×10 सेंटीमीटर का बड़ा ट्यूमर सामने आया।
ट्यूमर का आकार बड़ा होने के साथ-साथ इसकी लोकेशन भी बेहद संवेदनशील थी। यह किडनी, लिवर और शरीर की एक प्रमुख बड़ी रक्त वाहिका IVC (Inferior Vena Cava) के काफी करीब स्थित था। ऐसे में सर्जरी के दौरान आसपास के महत्वपूर्ण अंगों और रक्त वाहिका को सुरक्षित रखना चिकित्सकीय टीम के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती थी।
ओपन सर्जरी की जगह अपनाई गई लैप्रोस्कोपिक तकनीक
इतने बड़े ट्यूमर के मामले में आम तौर पर सर्जरी को लेकर कई तरह की चुनौतियां सामने आती हैं। Curesta ACMS Super Speciality Hospital में इस मरीज के केस का मूल्यांकन करने के बाद सर्जिकल टीम ने लैप्रोस्कोपिक तकनीक से ट्यूमर निकालने का निर्णय लिया।
सीनियर लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. (मेजर) रमेश दास के नेतृत्व में मरीज की सर्जरी की गई। चुनौतीपूर्ण लोकेशन और ट्यूमर के बड़े आकार के बावजूद लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए इसे सफलतापूर्वक निकाल लिया गया।
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में छोटे चीरे के माध्यम से विशेष कैमरा और सर्जिकल उपकरण शरीर के अंदर पहुंचाए जाते हैं। कैमरे से प्राप्त दृश्य को मॉनिटर पर देखकर सर्जन सर्जरी करते हैं। हालांकि, इस तकनीक का इस्तेमाल हर मरीज में एक जैसा नहीं होता और इसका निर्णय ट्यूमर की स्थिति, आकार, आसपास के अंगों और मरीज की समग्र स्थिति को देखकर सर्जिकल टीम करती है।
डॉ. रमेश दास ने बताया- दुर्लभ बीमारी की पहचान थी बड़ी चुनौती
इस पूरे केस को लेकर Curesta ACMS Super Speciality Hospital के सीनियर लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. (मेजर) रमेश दास ने बताया कि यह एक बेहद रेयर डिजीज का मामला था। उनके मुताबिक, इस तरह की स्थिति में बीमारी की पहचान करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब मरीज में लंबे समय से ब्लड प्रेशर के उतार-चढ़ाव जैसे लक्षण मौजूद हों लेकिन उनकी वास्तविक वजह सामने न आ रही हो।
डॉ. रमेश दास के अनुसार, इस केस में सही डायग्नोसिस तक पहुंचने में इमेजिंग जांच की महत्वपूर्ण भूमिका रही। MRI स्कैन के बाद Adrenal Gland में मौजूद बड़े ट्यूमर की स्थिति स्पष्ट हुई और इसके बाद सर्जरी की रणनीति तैयार की गई।
Adrenal Gland क्या होती है?
Adrenal Glands शरीर में किडनी के ऊपर स्थित छोटी ग्रंथियां होती हैं। ये कई महत्वपूर्ण हार्मोन बनाती हैं, जो शरीर में ब्लड प्रेशर, तनाव की प्रतिक्रिया, मेटाबॉलिज्म और अन्य शारीरिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं।
Adrenal Gland में बनने वाले ट्यूमर अलग-अलग प्रकार के हो सकते हैं। कुछ ट्यूमर हार्मोन बनाते हैं, जबकि कुछ हार्मोन का उत्पादन नहीं करते। इसलिए यदि किसी मरीज में बिना स्पष्ट कारण ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्या बार-बार सामने आ रही हो, तो डॉक्टर मरीज के लक्षणों और जांच के आधार पर Adrenal Gland से संबंधित कारणों पर भी विचार कर सकते हैं।
हालांकि, हर Adrenal Tumor कैंसरकारी हो, यह जरूरी नहीं है। ट्यूमर की प्रकृति का निर्धारण मरीज की जांच, इमेजिंग और आवश्यकता के अनुसार अन्य चिकित्सकीय परीक्षणों से किया जाता है।
किडनी, लिवर और IVC के करीब होने से बढ़ी चुनौती
संजय गुप्ता के मामले में ट्यूमर का आकार लगभग 8×10 सेंटीमीटर था। इसके अलावा इसकी लोकेशन ऐसी थी कि यह किडनी, लिवर और IVC के बेहद करीब था। IVC शरीर की एक प्रमुख बड़ी नस है, जो शरीर के निचले हिस्से से रक्त को हृदय की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इस वजह से सर्जरी के दौरान ट्यूमर को आसपास की संरचनाओं से सावधानीपूर्वक अलग करना जरूरी था। ऐसे जटिल केस में सर्जिकल प्लानिंग, अनुभव और टीमवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
मरीज को मिली राहत, अस्पताल ने बताया सफल उपचार
Curesta ACMS Super Speciality Hospital में की गई इस सर्जरी के बाद मरीज संजय गुप्ता के उपचार को सफल बताया गया है। गुमला से आए इस मरीज के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि लंबे समय से परेशान कर रही समस्या के पीछे मौजूद कारण की पहचान हुई और बड़े Adrenal Tumor को सर्जिकल प्रक्रिया के जरिए निकाल दिया गया।
यह केस इस बात को भी सामने लाता है कि कई बार शरीर में लंबे समय से मौजूद किसी समस्या का कारण सामान्य जांचों से स्पष्ट नहीं हो पाता। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय मूल्यांकन के साथ उचित इमेजिंग और विशेषज्ञ की सलाह बीमारी की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
Curesta ACMS Super Speciality Hospital, Irba में इस जटिल केस का लैप्रोस्कोपिक तकनीक से सफल उपचार चिकित्सा टीम के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। खास तौर पर बड़े आकार के ट्यूमर और उसके आसपास मौजूद महत्वपूर्ण अंगों को देखते हुए यह केस सर्जिकल प्लानिंग और विशेषज्ञता की जरूरत को रेखांकित करता है।