पश्चिम चंपारण। नेपाल के रसुआ जिले में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ में फंसे पश्चिम चंपारण के चार मजदूर सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। शुक्रवार देर शाम उनके घर पहुंचने पर परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। हालांकि, चनपटिया के पूर्वी तुरहापट्टी पंचायत के तीन परिवारों की चिंता अब भी बनी हुई है। बाढ़ के बाद से तीन मजदूर लापता हैं।
17 वर्षीय सलमान आलम ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे अचानक तेज पानी का सैलाब आया। देखते ही देखते पूरा इलाका पानी में डूब गया। सलमान किसी तरह ऊंचाई पर पहुंचकर अपनी जान बचाने में सफल रहा।
एक कमरे में रहते थे 7 मजदूर
सलमान के मुताबिक, सभी मजदूर नेपाल में बढ़ई, कारपेंटर और टाइल्स लगाने का काम करते थे। सात मजदूर एक ही कमरे में रहते थे। बाढ़ के दिन चार मजदूर काम पर गए थे, जबकि तीन कमरे पर थे। पानी कम होने के बाद तलाश शुरू हुई, जिसमें चार मजदूर सुरक्षित मिले, लेकिन तीन का अब तक पता नहीं चला।
लापता मजदूरों में सलमान के पिता अरमान आलम (35) के अलावा समीर अंसारी (23) और मोख्तार मियां (45) शामिल हैं।
हेलिकॉप्टर से बचाए गए मजदूर
बाढ़ में फंसे मजदूरों को नेपाल पुलिस ने हेलिकॉप्टर से धुन्चे स्थित आर्मी कैंप पहुंचाया। इसके बाद उन्हें त्रिशूली के उनवा कोट स्थित आर्मी कैंप ले जाया गया। जरूरी सुविधाएं मिलने के बाद चारों मजदूर काठमांडू पहुंचे और फिर वीरगंज-रक्सौल होते हुए शुक्रवार देर शाम अपने घर लौटे।
परिजनों को अब भी अपनों के लौटने का इंतजार
अरमान आलम की पत्नी शहरून खातून ने बताया कि पति और बेटा करीब एक महीने पहले नेपाल गए थे। बेटे के सुरक्षित लौटने से परिवार को राहत मिली है, लेकिन पति के लापता होने की चिंता बनी हुई है। परिजन लगातार उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए हुए हैं।
वहीं, नेपाल से लौटे मजदूरों ने बताया कि उनकी करीब एक महीने की मजदूरी भी फंसी हुई है। जान बचाकर घर लौटने की खुशी के साथ अब उन्हें बकाया मजदूरी की चिंता भी सता रही है।