रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने करीब 28 साल पुराने सड़क हादसे के मामले में मृतक के परिजनों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने मुआवजा राशि को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 7.60 लाख रुपये कर दिया है। साथ ही मुआवजा राशि पर दावा याचिका दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया है।

चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।

बीमा कंपनी ने पॉलिसी को बताया था फर्जी

मामला हजारीबाग मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के 1 जुलाई 2013 के फैसले से जुड़ा है। ट्रिब्यूनल ने जुबैदा खातून के दावे पर 2 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने हाई कोर्ट में अपील की थी।

बीमा कंपनी ने दावा किया था कि हादसे में शामिल वाहन का उसके यहां बीमा नहीं था और ट्रिब्यूनल में पेश की गई बीमा पॉलिसी की फोटो कॉपी फर्जी थी।

हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी को ठहराया जिम्मेदार

हाई कोर्ट ने कहा कि बीमा कंपनी ने ट्रिब्यूनल के सामने केवल लिखित बयान के जरिए पॉलिसी से इनकार किया, लेकिन अपने रिकॉर्ड पेश कर यह साबित नहीं किया कि संबंधित पॉलिसी उसके द्वारा जारी नहीं की गई थी।

अदालत ने यह भी कहा कि कथित फर्जीवाड़े के आरोप को साबित करने के लिए बीमा कंपनी की ओर से कोई स्वतंत्र साक्ष्य पेश नहीं किया गया। ऐसे में केवल अपील के दौरान पॉलिसी को फर्जी बताकर बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।

हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी को मुआवजा भुगतान के लिए जिम्मेदार मानते हुए अपील खारिज कर दी और मुआवजा राशि बढ़ाकर 7.60 लाख रुपये कर दी।