रांची। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने झारखंड के हजारीबाग स्थित सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (CWC) के एक अधिकारी और उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) अर्जित करने के आरोप में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अधिकारी ने अपने पद का कथित दुरुपयोग कर ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की।

सीबीआई की यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के मामलों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत की गई है। एजेंसी अब दोनों की संपत्तियों, निवेश, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है।

पहले रिश्वतखोरी मामले में हो चुकी थी गिरफ्तारी

सीबीआई के अनुसार संबंधित अधिकारी को इससे पहले एक कथित रिश्वतखोरी मामले में गिरफ्तार किया जा चुका था। इसी मामले की जांच के दौरान एजेंसी को उनकी वित्तीय गतिविधियों पर संदेह हुआ, जिसके बाद आय, खर्च और चल-अचल संपत्तियों की विस्तृत जांच शुरू की गई।

जांच में अधिकारी और उनकी पत्नी के नाम पर मौजूद संपत्तियों तथा उनके आय स्रोतों का बारीकी से विश्लेषण किया गया।

चार वर्षों की वित्तीय गतिविधियों की हुई जांच

सीबीआई ने 1 जनवरी 2022 से 24 अप्रैल 2026 तक की अवधि को जांच के दायरे में रखा। इस दौरान अधिकारी की वैध आय, पारिवारिक खर्च, निवेश और संपत्तियों का तुलनात्मक आकलन किया गया।

जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर दोनों की संपत्ति उनकी ज्ञात आय की तुलना में काफी अधिक पाई गई।

1.11 करोड़ रुपये की संदिग्ध संपत्ति का आरोप

सीबीआई के मुताबिक जांच में अधिकारी और उनकी पत्नी के नाम पर लगभग 1.11 करोड़ रुपये की ऐसी संपत्ति का पता चला है, जिसका संतोषजनक और वैध स्रोत जांच के दौरान स्पष्ट नहीं हो सका।

एजेंसी का दावा है कि यह संपत्ति उनकी घोषित आय से अधिक है और इसके संबंध में प्रस्तुत दस्तावेज पर्याप्त नहीं पाए गए।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR

प्रारंभिक जांच में मिले तथ्यों के आधार पर सीबीआई ने अधिकारी और उनकी पत्नी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा अन्य संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

एफआईआर दर्ज होने के बाद एजेंसी ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

बैंक खातों और निवेश की भी होगी जांच

सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अतिरिक्त संपत्ति किन स्रोतों से अर्जित की गई। इसके लिए बैंक खातों, निवेश, अचल संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

जरूरत पड़ने पर एजेंसी संबंधित लोगों से पूछताछ और अन्य कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी

हाल के वर्षों में केंद्रीय जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लगातार कार्रवाई कर रही हैं। सरकारी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज ऐसे मामलों में वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और संपत्तियों की विस्तृत जांच की जाती है, ताकि कथित अवैध संपत्ति के स्रोतों का पता लगाया जा सके।