रांची: झारखंड के हजारों सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी से जूझ रहे छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने करीब 6000 स्कूलों में स्थायी नियुक्ति होने तक संविदा शिक्षकों की बहाली की तैयारी शुरू कर दी है। इस संबंध में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है, जिसका उद्देश्य एकल शिक्षक विद्यालयों में पढ़ाई व्यवस्था को बेहतर बनाना और शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार लाना है।

राज्य में वर्तमान में 9,452 एकल शिक्षक विद्यालय हैं। इनमें से लगभग 6000 ऐसे विद्यालय हैं, जहां 30 से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। ऐसे स्कूलों में केवल एक शिक्षक के भरोसे पूरी शैक्षणिक व्यवस्था संचालित हो रही है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

छात्र संख्या के आधार पर होगी नियुक्ति

विभागीय प्रस्ताव के अनुसार, शिक्षकों की नियुक्ति केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) की तर्ज पर संविदा के आधार पर की जाएगी। किसी विद्यालय में छात्रों की संख्या के अनुसार एक से लेकर अधिकतम तीन शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकेगी।

सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि भविष्य में होने वाली स्थायी शिक्षक नियुक्तियों में संविदा शिक्षकों को वेटेज (अतिरिक्त अंक) दिया जाए। इससे योग्य अभ्यर्थियों को स्थायी नौकरी पाने में लाभ मिल सकता है।

सहायक अध्यापकों के बराबर मिल सकता है मानदेय

संविदा पर नियुक्त होने वाले शिक्षकों को सहायक अध्यापकों के समान मानदेय दिए जाने का प्रस्ताव है। हालांकि इस संबंध में अंतिम फैसला राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा।

शिक्षा विभाग के अनुसार, देश में आंध्र प्रदेश के बाद झारखंड में सबसे अधिक एकल शिक्षक विद्यालय हैं। ऐसे में इस पहल को शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जेटेट पास अभ्यर्थियों को मिलेगा मौका

संविदा शिक्षक बनने के लिए अभ्यर्थियों का झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) पास होना अनिवार्य होगा। नियुक्ति के लिए शैक्षणिक योग्यता भी सहायक आचार्य भर्ती के अनुरूप निर्धारित की जाएगी।

इसके साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया में राज्य सरकार के आरक्षण रोस्टर का पालन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया विद्यालय स्तर से शुरू होगी और स्थानीय उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।

स्थानीय अभ्यर्थियों को मिलेगी प्राथमिकता

प्रस्ताव के अनुसार, जिस प्रखंड में विद्यालय स्थित होगा, वहां के योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति में सबसे पहले प्राथमिकता दी जाएगी। यदि संबंधित प्रखंड में योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होते हैं, तो जिले के अन्य अभ्यर्थियों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद भी रिक्ति रहने पर दूसरे जिलों के अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जा सकेगी।

इन जिलों में सबसे ज्यादा एकल शिक्षक विद्यालय

झारखंड में एकल शिक्षक विद्यालयों की संख्या कई जिलों में काफी अधिक है। इनमें सबसे आगे दुमका (810) और गिरिडीह (809) हैं। इसके अलावा पश्चिमी सिंहभूम (753), पलामू (631), रांची (584), साहिबगंज (582), देवघर (529) और गोड्डा (510) जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालय संचालित हो रहे हैं।

वहीं रामगढ़ (96), कोडरमा (106), लोहरदगा (132) और जामताड़ा (156) जैसे जिलों में एकल शिक्षक विद्यालयों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।

शिक्षा व्यवस्था सुधारने की दिशा में बड़ा कदम

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से शिक्षक संकट से जूझ रहे विद्यालयों में संविदा शिक्षकों की नियुक्ति से बच्चों की पढ़ाई पर सकारात्मक असर पड़ेगा। इससे न केवल कक्षाओं का नियमित संचालन संभव होगा, बल्कि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल भी मिल सकेगा।