नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से चल रहे छात्र-युवा आंदोलन में सोमवार को एक महत्वपूर्ण मोड़ आया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी। यह फैसला सरकार की ओर से बातचीत की पहल और आंदोलन से जुड़ी मांगों पर चर्चा के आश्वासन के बाद लिया गया।
अभिजीत दिपके पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं के साथ धरने पर बैठे थे। आंदोलन का मुख्य मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा कथित पेपर लीक मामलों पर कार्रवाई की मांग रहा है। हाल के दिनों में यह आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था और बड़ी संख्या में छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता तथा विभिन्न सार्वजनिक हस्तियां भी इससे जुड़ीं।
आंदोलन को मिला व्यापक समर्थन
जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन को कई सामाजिक और सांस्कृतिक हस्तियों का समर्थन मिला। अभिनेत्री शबाना आजमी भी प्रदर्शन स्थल पहुंचीं और अभिजीत दिपके सहित आंदोलन में शामिल छात्रों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने छात्रों के प्रति समर्थन जताते हुए उनकी मांगों को गंभीरता से सुने जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस बीच आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिली। संसद मार्च के आह्वान के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग और लाठीचार्ज की खबरों ने आंदोलन को और अधिक चर्चा में ला दिया। इस घटनाक्रम के बाद कई सार्वजनिक हस्तियों और सामाजिक संगठनों ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बनी बातचीत की राह
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से आंदोलनकारियों से संवाद स्थापित करने की पहल की गई। इसी क्रम में CJP प्रतिनिधियों और सरकार के बीच बातचीत का रास्ता खुला, जिसके बाद अभिजीत दिपके ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया। हालांकि आंदोलन से जुड़ी मांगों को लेकर संगठन ने स्पष्ट किया है कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और वे छात्रों एवं युवाओं के मुद्दों को उठाते रहेंगे।
युवाओं के मुद्दों को राजनीति के केंद्र में लाने का दावा
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके पहले भी कई मंचों से यह कह चुके हैं कि उनका उद्देश्य रोजगार, शिक्षा, तकनीक, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाना है। हाल के महीनों में सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी और उसके अभियानों को व्यापक पहचान मिली है।
आगे क्या?
भूख हड़ताल समाप्त होने के बावजूद आंदोलन से जुड़े मुद्दे अभी भी चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत का क्या परिणाम निकलता है और शिक्षा तथा परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।