पलामू। झारखंड के पलामू जिले में नेशनल हाईवे फोरलेन परियोजना को लेकर गुरुवार को तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। सदर थाना क्षेत्र के चियांकी इलाके में जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे ग्रामीणों और प्रशासनिक टीम के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हिंसक झड़प में बदल गया। इस दौरान ग्रामीणों द्वारा किए गए पथराव में पुलिस बल के दो जवान घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर कैंप कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
प्रशासन के अनुसार, विवाद जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर चल रहा था। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें उचित मुआवजा दिए बिना निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है। घटना के बाद कुछ समय के लिए नेशनल हाईवे पर भी यातायात बाधित रहा।
जमीन अधिग्रहण के दौरान भड़का विवाद
जानकारी के अनुसार, चियांकी इलाके से गुजरने वाली नेशनल हाईवे फोरलेन परियोजना के लिए प्रशासन की टीम गुरुवार को जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने मौके पर पहुंची थी।
टीम के पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां एकत्र हो गए और जमीन अधिग्रहण का विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक उन्हें तय मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
शुरुआत में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बातचीत हुई, लेकिन सहमति नहीं बनने पर माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गया।
बहस के बाद शुरू हुआ पथराव
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच कहासुनी के बाद स्थिति अचानक बिगड़ गई।
कुछ ही देर में दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की की नौबत आ गई और इसके बाद ग्रामीणों की ओर से कथित तौर पर पथराव शुरू हो गया।
पथराव के कारण मौके पर अफरा-तफरी मच गई और पुलिस बल को स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।
दो पुलिसकर्मी घायल
पथराव की घटना में झारखंड आर्म्ड पुलिस (JAP) के जवान राजमोहन सिंह और सहायक पुलिस की महिला जवान प्रिया सिंह घायल हो गईं।
दोनों को तत्काल इलाज के लिए मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल भेजा गया, जहां उनका उपचार चल रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, दोनों जवानों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
कुछ देर के लिए जाम रहा नेशनल हाईवे
घटना के दौरान नाराज ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे को भी कुछ समय के लिए जाम कर दिया।
हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
बाद में पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद यातायात धीरे-धीरे सामान्य कराया गया।
मुआवजे को लेकर लंबे समय से विवाद
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि फोरलेन परियोजना के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित की जा रही है, लेकिन अभी तक उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला है।
ग्रामीणों का आरोप है कि मुआवजा प्रक्रिया पूरी किए बिना निर्माण कार्य शुरू करने की कोशिश की जा रही है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं।
दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि परियोजना सरकार की महत्वपूर्ण विकास योजनाओं में शामिल है और सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की जा रही हैं।
पहले से लागू थी निषेधाज्ञा
संभावित विवाद को देखते हुए सदर एसडीएम संजय पांडेय ने पहले ही 9 और 10 जुलाई के लिए चियांकी इलाके में निषेधाज्ञा (धारा 163 बीएनएसएस के तहत लागू प्रशासनिक प्रतिबंध) लागू की थी।
प्रशासन का उद्देश्य था कि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो।
इसके बावजूद गुरुवार को स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
मौके पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी
घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी राजेश यादव सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों ने अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी और ग्रामीणों से बातचीत शुरू की।
समाचार लिखे जाने तक अधिकारी लगातार ग्रामीणों के साथ वार्ता कर रहे थे ताकि विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।
पुलिस ने क्या कहा?
सदर थाना प्रभारी अफजल अंसारी ने बताया कि चियांकी क्षेत्र में पथराव की घटना हुई है, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
विकास परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण की चुनौती
झारखंड सहित देश के कई राज्यों में सड़क, रेलवे और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं के दौरान भूमि अधिग्रहण एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है।
कई बार मुआवजे की राशि, पुनर्वास और भूमि मूल्यांकन को लेकर स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच विवाद उत्पन्न हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परियोजनाओं में पारदर्शिता, समय पर मुआवजा और स्थानीय लोगों से निरंतर संवाद बेहद जरूरी है, ताकि विकास कार्य बिना विवाद के पूरे किए जा सकें।
प्रशासन की प्राथमिकता
प्रशासन का कहना है कि फोरलेन परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण है और इसे निर्धारित समय पर पूरा करना आवश्यक है।
साथ ही अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रभावित लोगों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जाएगी और सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।
यदि किसी स्तर पर शिकायत है तो उसका समाधान नियमों के तहत किया जाएगा।
आगे क्या?
फिलहाल इलाके में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।
पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और वीडियो फुटेज व अन्य साक्ष्यों के आधार पर पथराव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है।
साथ ही प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बातचीत का दौर भी जारी है, ताकि मुआवजे के मुद्दे का समाधान निकालकर निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया जा सके।
निष्कर्ष
पलामू के चियांकी इलाके में फोरलेन परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर हुआ विवाद एक बार फिर यह दिखाता है कि विकास परियोजनाओं के साथ स्थानीय लोगों की सहमति और समय पर मुआवजा कितना महत्वपूर्ण है। पथराव में दो पुलिसकर्मियों के घायल होने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है और मामले की जांच शुरू कर दी है। अब सभी की नजर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि परियोजना आगे कैसे बढ़ेगी और विवाद का समाधान किस तरह निकलेगा।