पाकुड़: झारखंड के पाकुड़ जिले में बुधवार को वर्ष 2013 में नक्सली हमले में शहीद हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमरजीत बलिहार सहित पांच बहादुर जवानों की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। पुलिस विभाग द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और शहीदों के परिजनों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में पाकुड़ के पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह, उप विकास आयुक्त अरविंद कुमार लाल, अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, पुलिस निरीक्षक, विभिन्न थाना प्रभारी और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने शहीद एसपी अमरजीत बलिहार की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया और उनके अदम्य साहस एवं बलिदान को याद किया।

श्रद्धांजलि सभा के दौरान शहीद जवानों के परिजनों को भी सम्मानित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि शहीदों का बलिदान हमेशा देश और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा तथा उनकी शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

श्रद्धांजलि समारोह में उमड़ा सम्मान का भाव

पाकुड़ पुलिस लाइन में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में सबसे पहले दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने पुष्प अर्पित कर शहीदों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम के दौरान पुलिस बैंड द्वारा शोक धुन भी बजाई गई, जिसने पूरे माहौल को भावुक बना दिया। शहीदों के परिजनों की मौजूदगी में सभी अधिकारियों ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।

शहीदों के परिजनों को किया गया सम्मानित

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग की ओर से शहीद जवानों के परिजनों को सम्मानित किया गया।

अधिकारियों ने परिजनों को आश्वस्त किया कि पुलिस परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा है और भविष्य में भी हर संभव सहयोग करता रहेगा।

इस अवसर पर कई पुलिसकर्मियों ने शहीदों के परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल भी जाना।

एसपी अनुदीप सिंह ने शहीदों को किया नमन

कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए पाकुड़ एसपी अनुदीप सिंह ने कहा कि तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार और उनके साथ शहीद हुए जवानों का बलिदान पुलिस विभाग कभी नहीं भूल सकता।

उन्होंने कहा कि शहीदों ने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। ऐसे वीर जवान हमेशा पुलिस बल के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।

एसपी ने कहा कि पुलिस विभाग केवल शहादत की बरसी पर ही उन्हें याद नहीं करता, बल्कि समय-समय पर उनके परिवारों का भी सम्मान करता है और हर संभव सहायता देने का प्रयास करता है।

जवानों की प्रतिमा स्थापित करने की उठी मांग

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान शहीद जवानों की प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठी।

इस संबंध में एसपी अनुदीप सिंह ने कहा कि पुलिसकर्मियों की ओर से लंबे समय से यह मांग की जा रही है कि शहीद जवानों की भी प्रतिमाएं स्थापित की जाएं।

उन्होंने कहा कि इस विषय पर जिला उपायुक्त से चर्चा की जाएगी और जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक पहल करने का प्रयास किया जाएगा।

एसपी ने कहा कि इससे आने वाली पीढ़ियों को शहीदों के साहस और बलिदान की जानकारी मिलेगी तथा समाज में उनके प्रति सम्मान और बढ़ेगा।

2 जुलाई 2013 का वह काला दिन

झारखंड पुलिस के इतिहास में 2 जुलाई 2013 का दिन आज भी बेहद दुखद घटनाओं में गिना जाता है।

उस दिन तत्कालीन पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार दुमका में आयोजित डीआईजी की प्रमंडलीय बैठक में शामिल होने के बाद अपने पुलिस काफिले के साथ वापस पाकुड़ लौट रहे थे।

जब उनका काफिला दुमका जिले के काठीकुंड थाना क्षेत्र स्थित जमनी नाला के पास पहुंचा, तभी पहले से घात लगाए नक्सलियों ने अचानक हमला कर दिया।

घात लगाकर किया गया था हमला

बताया जाता है कि नक्सलियों ने पूरी योजना के तहत पुलिस काफिले को निशाना बनाया था।

जैसे ही पुलिस वाहन जमनी नाला के समीप पहुंचा, नक्सलियों ने चारों ओर से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।

पुलिसकर्मियों ने भी बहादुरी से जवाबी कार्रवाई की, लेकिन नक्सलियों की संख्या अधिक होने के कारण मुठभेड़ बेहद भीषण हो गई।

इस मुठभेड़ में तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार समेत कई पुलिसकर्मियों ने वीरगति प्राप्त की।

इन वीर जवानों ने दी थी सर्वोच्च शहादत

इस नक्सली हमले में शहीद होने वालों में—

  • तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार
  • मनोज हेम्ब्रम
  • संतोष मंडल
  • राजीव कुमार शर्मा
  • अंगरक्षक चंदन थापा
  • चालक वीरेंद्र श्रीवास्तव

शामिल थे।

वहीं निजी चालक धनराज मड़ैया और एक अन्य पुलिस जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

यह घटना पूरे झारखंड ही नहीं बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बनी थी।

घटना के बाद चला बड़ा अभियान

इस नक्सली हमले के बाद झारखंड पुलिस ने व्यापक अभियान चलाया।

जांच और अभियान के दौरान कई नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कई मुठभेड़ों में मारे भी गए।

पुलिस ने प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और भी मजबूत की तथा नक्सली गतिविधियों पर लगातार कार्रवाई की।

शहादत से मिलती है प्रेरणा

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि अमरजीत बलिहार और उनके साथियों का बलिदान पुलिस बल के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगा।

उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी हर परिस्थिति में जनता की सुरक्षा के लिए अपने कर्तव्य का पालन करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटते।

युवाओं के लिए प्रेरणा हैं शहीद

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने युवाओं से भी शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की।

उन्होंने कहा कि देश सेवा, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और साहस जैसे मूल्यों को अपनाकर ही शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है।

निष्कर्ष

पाकुड़ में शहीद एसपी अमरजीत बलिहार और उनके साथ शहीद हुए जवानों की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह ने एक बार फिर 2 जुलाई 2013 के उस दर्दनाक नक्सली हमले की याद ताजा कर दी। पुलिस अधिकारियों ने शहीदों को नमन करते हुए उनके परिवारों का सम्मान किया और उनकी स्मृति को सदैव जीवित रखने का संकल्प दोहराया। साथ ही जवानों की प्रतिमा स्थापित करने की दिशा में भी पहल करने की बात कही गई। यह आयोजन न केवल शहीदों के प्रति सम्मान का प्रतीक था, बल्कि देश और समाज के लिए उनके अद्वितीय बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ।