रांची: लंबित वेतन भुगतान की मांग को लेकर आंदोलनरत व्यावसायिक प्रशिक्षण शिक्षकों का विरोध-प्रदर्शन शनिवार को भी जारी रहा। 13 माह से बकाया वेतन के भुगतान की मांग को लेकर शिक्षक मुख्यमंत्री आवास घेराव करने निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया।
व्यावसायिक प्रशिक्षण शिक्षक पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। शिक्षकों का आरोप है कि लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई शिक्षकों के लिए परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है।
मुख्यमंत्री आवास घेराव के लिए निकले थे शिक्षक
शनिवार को बड़ी संख्या में व्यावसायिक प्रशिक्षण शिक्षक अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे थे। इस दौरान पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ देर तक बातचीत भी हुई, लेकिन शिक्षक अपनी मांगों पर अड़े रहे।
शिक्षकों का कहना है कि जब तक उनकी लंबित वेतन राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
13 माह से नहीं मिला वेतन
आंदोलन कर रहे शिक्षकों के अनुसार उन्हें पिछले 13 माह से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। इसके कारण कई शिक्षक आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि वे नियमित रूप से विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उनका पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है।
शिक्षकों ने सरकार से जल्द बकाया राशि का भुगतान करने और उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।
सरकार से जल्द हस्तक्षेप की मांग
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने राज्य सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि लंबे समय से वेतन लंबित रहने के कारण उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। कई शिक्षकों को कर्ज लेकर घर चलाने की नौबत आ गई है।
शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर
शिक्षकों का कहना है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो इसका असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द से जल्द बकाया वेतन जारी करने की मांग की है।
फिलहाल व्यावसायिक प्रशिक्षण शिक्षकों का आंदोलन जारी है और सभी की नजरें सरकार की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।