रांची: झारखंड सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कार्यरत हजारों कर्मियों, स्वयं सहायता समूहों और विकास योजनाओं से जुड़े लाभुकों को बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार के मनरेगा आयुक्त कार्यालय ने सभी जिलों को सामग्री मद (Material Component) के लंबित भुगतानों के निपटारे के लिए कुल 172.65 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। यह राशि एसएनए-स्पर्श मॉडल के माध्यम से आवंटित की गई है, जिससे लंबे समय से लंबित भुगतान को तेजी से पूरा करने की उम्मीद जगी है।

सरकार के इस फैसले को ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे तकनीकी सहायकों, अभियंताओं, मेट, स्वयं सहायता समूहों और अन्य लाभुकों को इससे सीधा लाभ मिलेगा।

लंबित भुगतान को लेकर लगातार उठ रहे थे सवाल

पिछले कई महीनों से मनरेगा के तहत कार्य करने वाले कर्मियों और लाभुकों द्वारा भुगतान में देरी को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। कई जिलों में तकनीकी सहायकों, जूनियर इंजीनियरों, मेट और अन्य कर्मचारियों का वेतन लंबित था।

इसके अलावा विभिन्न विकास योजनाओं में सामग्री आपूर्ति करने वाले एजेंसियों और स्वयं सहायता समूहों को भी भुगतान नहीं मिल पाने के कारण कार्य प्रभावित हो रहे थे।

ग्रामीण विकास विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि भुगतान में देरी से योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ रहा है। इसी को देखते हुए सरकार ने एकमुश्त बड़ी राशि जारी कर लंबित मामलों को निपटाने का निर्णय लिया।

सामग्री मद में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी

मनरेगा आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सामग्री मद में केंद्र सरकार और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 75:25 के अनुपात में होती है।

जिलों को निर्देश दिया गया है कि आवंटित राशि का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर किया जाए ताकि लंबित देनदारियों का जल्द से जल्द भुगतान सुनिश्चित हो सके।

सरकार ने यह भी कहा है कि भुगतान प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही या अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

इन मदों में होगा भुगतान

जारी राशि का उपयोग कई महत्वपूर्ण भुगतान मदों के लिए किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

तकनीकी सहायकों का लंबित वेतन

सहायक अभियंताओं का भुगतान

कनीय अभियंताओं (जेई) का वेतन

बीएफटी (Bare Foot Technician) कर्मियों का भुगतान

मेट के लंबित मानदेय का निपटारा

दीदी बगिया योजना से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का भुगतान

विशेष हरित ग्राम योजना की लंबित देनदारियां

पूर्ण हो चुकी योजनाओं के भुगतान का निपटारा

मनरेगासॉफ्ट में लंबित योजनाओं को बंद करने की प्रक्रिया

सरकार का मानना है कि इन भुगतानों के पूरा होने से कई योजनाओं में रुकी हुई गतिविधियां दोबारा गति पकड़ेंगी।

1 जुलाई से पहले खर्च करने का निर्देश

आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी पत्र में एक महत्वपूर्ण निर्देश भी दिया गया है।

पत्र में कहा गया है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार की अधिसूचना के अनुसार 1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह वीबीरामजी एक्ट लागू किए जाने का प्रस्ताव है।

ऐसी स्थिति में वर्तमान एसएनए-स्पर्श मॉडल के तहत जारी राशि के उपयोग में भविष्य में प्रशासनिक कठिनाइयां आ सकती हैं।

इसी वजह से सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि उपलब्ध राशि का समयबद्ध और प्राथमिकता आधारित उपयोग सुनिश्चित किया जाए तथा 1 जुलाई से पहले अधिकतम लंबित भुगतान पूरे कर लिए जाएं।

ग्रामीण विकास परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण कई ग्रामीण विकास परियोजनाएं प्रभावित हो रही थीं।

कई स्थानों पर कार्य पूर्ण होने के बावजूद भुगतान नहीं होने से योजनाओं को बंद नहीं किया जा सका था।

अब नई राशि जारी होने के बाद परियोजनाओं के वित्तीय समापन में तेजी आएगी और नए कार्यों को भी गति मिलेगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, तालाब निर्माण और अन्य विकास कार्यों को इसका लाभ मिलने की संभावना है।

स्वयं सहायता समूहों को भी राहत

सरकार के इस निर्णय का सबसे बड़ा लाभ महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलने की उम्मीद है।

विशेष रूप से दीदी बगिया योजना से जुड़ी महिलाओं को लंबे समय से भुगतान का इंतजार था।

कई समूहों ने योजना के तहत पौधारोपण, बागवानी और अन्य गतिविधियों में भाग लिया था, लेकिन भुगतान लंबित होने के कारण आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा था।

अब राशि जारी होने से इन समूहों को राहत मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

संताल परगना के जिलों को मिला बड़ा आवंटन

राज्य सरकार द्वारा जारी राशि में संताल परगना क्षेत्र के छह जिलों को भी महत्वपूर्ण हिस्सा मिला है।

जिला

आवंटित राशि (करोड़ रुपये में)

गोड्डा

15.00

जामताड़ा

10.50

पाकुड़

9.30

दुमका

8.80

देवघर

8.40

साहिबगंज

7.70

इन जिलों में लंबे समय से लंबित भुगतानों के निपटारे में यह राशि महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

गोड्डा को मिला सबसे अधिक आवंटन

संताल परगना क्षेत्र में सबसे अधिक 15 करोड़ रुपये की राशि गोड्डा जिले को आवंटित की गई है।

इसके पीछे जिले में चल रही बड़ी संख्या में विकास योजनाएं और लंबित भुगतान को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

वहीं जामताड़ा को 10.50 करोड़ रुपये, पाकुड़ को 9.30 करोड़ रुपये, दुमका को 8.80 करोड़ रुपये, देवघर को 8.40 करोड़ रुपये और साहिबगंज को 7.70 करोड़ रुपये मिले हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि लंबित भुगतान के निपटारे से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह बढ़ेगा।

जब कर्मियों, मजदूरों और स्वयं सहायता समूहों को भुगतान मिलेगा तो इसका सीधा असर स्थानीय बाजारों पर भी दिखाई देगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति बढ़ेगी और छोटे व्यवसायों को भी इसका लाभ मिलेगा।

सरकार के फैसले से बढ़ी उम्मीदें

झारखंड सरकार द्वारा जारी की गई 172.65 करोड़ रुपये की राशि को मनरेगा से जुड़े लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

लंबे समय से वेतन और मानदेय की प्रतीक्षा कर रहे हजारों कर्मियों को अब भुगतान मिलने की उम्मीद है।

इसके साथ ही अधूरी और लंबित परियोजनाओं को पूरा करने तथा ग्रामीण विकास योजनाओं को नई गति देने में भी यह फैसला महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

फिलहाल सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं और अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 1 जुलाई से पहले लंबित भुगतानों का निपटारा कितनी तेजी से किया जाता है।