पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण से पहले एक नाम अचानक सुर्खियों में आ गया है—IPS अजय पाल शर्मा। उत्तर प्रदेश पुलिस में ‘सिंघम’ और ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के तौर पर पहचान रखने वाले इस अधिकारी की तैनाती ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान में जिन इलाकों में वोटिंग होनी है, वे लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत गढ़ माने जाते हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने कड़ी रणनीति अपनाई है।


दक्षिण 24 परगना में तैनाती क्यों बनी चर्चा का विषय?

अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस पर्यवेक्षक बनाया गया है। यह इलाका TMC के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है।

इस संवेदनशील क्षेत्र में उनकी तैनाती को राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। आमतौर पर चुनावों में बाहरी अधिकारियों की नियुक्ति होती है, लेकिन इस बार जिस प्रोफाइल के अधिकारी को चुना गया है, उसने चर्चाओं को और हवा दे दी है।


एक्शन मोड में दिखे IPS अजय पाल शर्मा

तैनाती के बाद अजय पाल शर्मा पूरी तरह एक्शन में नजर आ रहे हैं।
वे लगातार संवेदनशील इलाकों का दौरा कर रहे हैं और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रहे हैं।

  • शिकायत मिलने पर तुरंत मौके पर पहुंचे
  • सुरक्षा बलों के साथ फ्लैग मार्च
  • सख्त लहजे में चेतावनी

एक वायरल वीडियो में उन्हें साफ कहते सुना गया—
“अगर गड़बड़ी हुई तो अच्छे से खबर ली जाएगी।”


TMC नेता जहांगीर खान पर कार्रवाई से बढ़ा विवाद

अजय पाल शर्मा की अगुवाई में एसएसबी, एफएसटी और क्यूआरटी की टीम ने TMC नेता और उम्मीदवार जहांगीर खान के ठिकानों पर छापेमारी की।

यह कार्रवाई इसलिए और चर्चा में आ गई क्योंकि जहांगीर खान को अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है।

इस घटना के बाद:

  • राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज
  • निष्पक्षता बनाम टारगेटिंग पर बहस
  • चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल

अखिलेश यादव का बड़ा आरोप

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने अजय पाल शर्मा को “भाजपा का एजेंट” तक बता दिया।

अखिलेश यादव ने कहा:

  • “हम न इन्हें भागने देंगे, न भूमिगत होने देंगे।”
  • “इनकी हर कार्रवाई की जांच होगी।”
  • “लोकतंत्र के अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा।”

उनका बयान इस पूरे विवाद को और राजनीतिक रंग दे रहा है।


29 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026:

  • पहला चरण (23 अप्रैल): 152 सीटों पर मतदान
  • दूसरा चरण (29 अप्रैल): 142 सीटों पर मतदान

इन सीटों में कोलकाता समेत कई संवेदनशील इलाके शामिल हैं।
इसी वजह से चुनाव आयोग ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं और विशेष पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है।


कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा?

अजय पाल शर्मा का नाम उत्तर प्रदेश पुलिस के तेज-तर्रार अधिकारियों में गिना जाता है।

उनके करियर की खास बातें:

  • 2011 बैच के IPS अधिकारी
  • शामली, नोएडा, जौनपुर और रामपुर में पोस्टिंग
  • अपराधियों के खिलाफ बड़े अभियान
  • कई चर्चित एनकाउंटर

उनकी कार्यशैली हमेशा सख्त और एक्शन-ओरिएंटेड रही है, जिससे उन्हें ‘सिंघम’ की छवि मिली।


TMC क्यों उठा रही सवाल?

तृणमूल कांग्रेस इस तैनाती को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है।

पार्टी का कहना है:

  • क्या स्थिति इतनी गंभीर है कि ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ भेजना पड़ा?
  • क्या इससे मतदाताओं में डर का माहौल बनेगा?

दूसरी ओर, विपक्ष इसे निष्पक्ष चुनाव की दिशा में जरूरी कदम बता रहा है।


क्या निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो पाएगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि:

👉 क्या अजय पाल शर्मा की सख्त रणनीति चुनाव को निष्पक्ष बनाएगी?
👉 या फिर यह राजनीतिक टकराव को और बढ़ाएगी?

29 अप्रैल को होने वाला मतदान इस बात का जवाब देगा कि चुनाव आयोग की रणनीति कितनी कारगर साबित होती है।


निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 का दूसरा चरण शुरू होने से पहले ही सियासी माहौल गरमा चुका है।
IPS अजय पाल शर्मा की तैनाती ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि:

  • क्या मतदान शांतिपूर्ण होगा?
  • क्या आरोप-प्रत्यारोप और बढ़ेंगे?