पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में भीषण गर्मी और लू से बचाव के लिए एक अनोखी पहल की जा रही है। जिले के स्कूलों में ‘वॉटर बेल’ (पानी पीने की घंटी) कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू किया गया है। इस पहल के तहत कक्षा 1 से 12 तक के करीब 4 लाख बच्चे रोजाना निर्धारित समय पर पानी पी रहे हैं।

यह कार्यक्रम बच्चों को डिहाइड्रेशन और लू से बचाने के लिए काफी कारगर साबित हो रहा है।


दिन में दो बार बजती है ‘वॉटर बेल’

इस अभियान के तहत:

  • सुबह 8:30 बजे पहली घंटी
  • सुबह 10:30 बजे दूसरी घंटी

घंटी बजते ही सभी बच्चों को एक-एक गिलास पानी पीने के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे बच्चों में नियमित रूप से पानी पीने की आदत विकसित हो रही है।


बच्चों को दिए जा रहे पौष्टिक पेय पदार्थ

सिर्फ सादा पानी ही नहीं, बल्कि बच्चों को कई तरह के पौष्टिक पेय भी दिए जा रहे हैं, जैसे:

  • नींबू पानी
  • सत्तू शरबत
  • आम का शरबत
  • नमक-चीनी का घोल

इन पेय पदार्थों से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और बच्चे गर्मी के दुष्प्रभाव से सुरक्षित रहते हैं।


स्कूलों को जारी किए गए सख्त निर्देश

जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की ओर से सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं:

  • स्वच्छ पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें
  • घड़ा, गिलास आदि उपलब्ध कराएं
  • बच्चों को कतारबद्ध तरीके से पानी पिलाएं
  • मध्याह्न भोजन छांव में कराएं
  • ओआरएस (ORS) की उपलब्धता सुनिश्चित करें

इसके साथ ही, बच्चों को गुड़, चना, सत्तू और कच्चे आम के शरबत जैसे पेय पदार्थ लेने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।


यूनिसेफ के सुझाव पर शुरू हुआ कार्यक्रम

यह कार्यक्रम यूनिसेफ के सुझाव पर शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य:

  • बच्चों को स्वच्छ पानी के महत्व के प्रति जागरूक करना
  • गर्मी और लू के दुष्प्रभाव से बचाना
  • डिहाइड्रेशन की समस्या को रोकना

नियमित मॉनिटरिंग से मिल रहे अच्छे परिणाम

इस कार्यक्रम की रोजाना मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे इसकी प्रभावशीलता बनी हुई है। स्कूलों के समय में भी बदलाव किया गया है, ताकि बच्चे भीषण गर्मी से बच सकें।

शिक्षकों और प्रशासन की सक्रियता के कारण यह पहल सफल होती नजर आ रही है।


क्यों जरूरी है ‘वॉटर बेल’ अभियान?

गर्मी के मौसम में बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है। यह अभियान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  • बच्चों को नियमित पानी पीने की आदत डालता है
  • लू और डिहाइड्रेशन से बचाव करता है
  • स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाता है

निष्कर्ष

चाईबासा के स्कूलों में चल रहा ‘वॉटर बेल’ कार्यक्रम एक सराहनीय पहल है, जो बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी साबित हो रहा है। यदि इसी तरह अन्य जिलों में भी इस मॉडल को अपनाया जाए, तो गर्मी के दौरान बच्चों को बड़ी राहत मिल सकती है।