देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट के साथ-साथ ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। इसी को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक बड़ा प्रस्ताव रखा है, जो आने वाले समय में डिजिटल ट्रांजैक्शन के तरीके को बदल सकता है।

 

RBI ने सुझाव दिया है कि ₹10,000 से ज्यादा के डिजिटल ट्रांजैक्शन में 1 घंटे की देरी लागू की जाए। इसका मकसद ग्राहकों को गलत ट्रांजैक्शन रोकने या कैंसिल करने का समय देना है।

 

हालांकि, अभी यह सिर्फ एक प्रस्ताव है और इसे लागू नहीं किया गया है।

 

क्यों जरूरी है यह नया नियम?

 

RBI के अनुसार, देश में होने वाले डिजिटल फ्रॉड का बड़ा हिस्सा हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन से जुड़ा है।

 

आंकड़े क्या कहते हैं?

₹10,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन: करीब 45% फ्रॉड केस

रकम के हिसाब से हिस्सा: लगभग 98.5%

 

इससे साफ है कि बड़ी रकम के ट्रांजैक्शन में जोखिम ज्यादा होता है।

 

RBI का मानना है कि जालसाज अक्सर लोगों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। ऐसे में 1 घंटे की देरी से यूजर को सोचने का मौका मिलेगा।

 

कैसे काम करेगा 1 घंटे का डिले सिस्टम?

 

अगर यह नियम लागू होता है, तो प्रक्रिया कुछ इस तरह होगी:

 

₹10,000 से ज्यादा का ट्रांजैक्शन तुरंत खाते से कट जाएगा

लेकिन पैसे लाभार्थी के खाते में 1 घंटे बाद जमा होंगे

इस दौरान ग्राहक ट्रांजैक्शन को कभी भी कैंसिल कर सकता है

बैंक संदिग्ध गतिविधि पर अलर्ट भेज सकता है

 

इससे फ्रॉड को रोकने में काफी मदद मिल सकती है।

‘किल स्विच’ फीचर: एक क्लिक में पेमेंट बंद

 

RBI ने एक और अहम सुझाव दिया है—‘किल स्विच’।

 

क्या है किल स्विच?

 

अगर आपको लगता है कि:

 

आपका अकाउंट हैक हो गया है

कोई गलत ट्रांजैक्शन हो रहा है

 

तो आप एक क्लिक में सभी डिजिटल पेमेंट सेवाएं बंद कर सकते हैं।

 

यह फीचर फ्रॉड के समय तुरंत एक्शन लेने में मदद करेगा।

 

सीनियर सिटीजंस के लिए खास सुरक्षा

 

RBI ने बुजुर्गों और दिव्यांगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी प्रस्ताव दिया है।

सीनियर सिटीजंस के लिए खास सुरक्षा

 

RBI ने बुजुर्गों और दिव्यांगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी प्रस्ताव दिया है।

 

नए नियम के तहत:

70 साल से ज्यादा उम्र के लोग

₹50,000 से ज्यादा ट्रांजैक्शन पर

एक ‘ट्रस्टेड पर्सन’ की मंजूरी जरूरी हो सकती है

 

यह फ्रॉड से बचाव की एक अतिरिक्त सुरक्षा परत होगी।

 

‘व्हाइटलिस्ट’ से मिलेगी राहत

 

अगर आप नियमित रूप से किसी व्यक्ति या मर्चेंट को पैसे भेजते हैं, तो आप उन्हें व्हाइटलिस्ट में जोड़ सकते हैं।

 

इसका फायदा:

व्हाइटलिस्टेड अकाउंट पर 1 घंटे की देरी लागू नहीं होगी

रोजमर्रा के ट्रांजैक्शन में परेशानी नहीं होगी

आम लोगों पर क्या होगा असर?

 

इस प्रस्ताव का आम नागरिकों पर मिला-जुला असर पड़ सकता है।

 

फायदे:

ऑनलाइन फ्रॉड में कमी

ट्रांजैक्शन कैंसिल करने का मौका

सुरक्षा में सुधार

संभावित नुकसान:

पैसे ट्रांसफर में देरी

बिजनेस और इमरजेंसी पेमेंट में परेशानी

कब लागू होंगे ये नियम?

 

फिलहाल RBI ने इस प्रस्ताव पर लोगों और संस्थाओं से 8 मई तक सुझाव मांगे हैं। इसके बाद:

 

सुझावों की समीक्षा होगी

फिर ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की जा सकती हैं

निष्कर्ष

 

डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित बनाने के लिए RBI का यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि इससे ट्रांजैक्शन की गति थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन फ्रॉड से बचाव के लिहाज से यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

 

👉 आप क्या सोचते हैं?

क्या ₹10,000 से ज्यादा ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे की देरी सही फैसला है? कमेंट में अपनी राय जरूर दें।